वैश्विक स्वास्थ्य डेटा पर नजर डालें तो पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में जो स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं, मोटापा उनमें से एक है। डायबिटीज से लेकर हृदय रोग हो या फिर कोविड-19 का संक्रमण इन सभी स्थितियों में मोटापे या अधिक वजन की समस्या को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जाता रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अन्य लोगों की तुलना में जिन लोगों को मोटापे की समस्या होती है, उनमें गंभीर बीमारियों के विकसित होने का जोखिम कई गुना अधिक हो सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर्स सभी उम्र के लोगों को अपने वजन को कंट्रोल रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते रहते हैं।
विशेषज्ञों ने चेताया: वजन बढ़ना आपका सबसे बड़ा दुश्मन, ये कई जानलेवा बीमारियों का भी बढ़ा देती है खतरा
हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा
शरीर का वजन बढ़ने के कारण जिन बीमारियों के विकसित होने का जोखिम अधिक होता है, हृदय रोग उनमें से एक है। अतिरिक्त वजन के कारण आपको उच्च रक्तचाप और हाई कोलेस्ट्रॉल होने की आशंका बढ़ जाती है, ये दोनों स्थितियां आपमें हृदय रोग या स्ट्रोक का कारण बन सकती हैं। अच्छी खबर यह है कि वजन कम करने से इस जोखिमों से आसानी से बचाव किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वजन को नियंत्रित करके हृदय रोगों की गंभीर जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है। हृदय रोग मौजूदा समय की सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है।
हो सकते हैं डायबिटीज के शिकार
अध्ययनों में पाया गया है कि टाइप-2 डायबिटीज वाले अधिकांश लोग अधिक वजन वाले या मोटपे के शिकार होते हैं। यदि आपको टाइप-2 डायबिटीज है, तो वजन कम करना और अधिक शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, आपमें रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है। शारीरिक सक्रियता और व्यायाम को बढ़ाने से आपकी मधुमेह की दवा के प्रति आवश्यकता कम हो सकती है। वहीं यदि आपका वजन बढ़ा हुआ है तो इस स्थिति में कई तरह की अन्य डायबिटीज से संबंधित जोखिम भी हो सकते हैं।
ऑस्टियोआर्थराइटिस का जोखिम
अधिक वजन की समस्या के शिकार लोगों में ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसे गठिया रोगों का जोखिम काफी अधिक होता है। वजन अधिक होने से घुटनों पर दबाव काफी बढ़ जाता है जिसके कारण गठिया होने का खतरा अधिक रहता है। ऑस्टियोआर्थराइटिस की स्थिति घुटने, कूल्हे और पीठ को प्रभावित करती है। वजन घटाने से घुटनों, कूल्हों और पीठ के निचले हिस्से पर तनाव कम होता है और क्रोनिक ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों में सुधार किया जा सकता है।
स्लीप एपनिया की समस्या
अधिक वजन या मोटापे के शिकार लोगों में स्लीप एपनिया होने का खतरा सामान्यतौर पर अधिक होता है। स्लीप एपनिया में व्यक्ति तेज खर्राटे लेने लगता है और नींद के दौरान थोड़ी देर के लिए सांस बंद भी हो सकती है। स्लीप एपनिया के कारण दिन में अधिक नींद आती है। इसके कारण हृदय रोग और स्ट्रोक की आशंका भी अधिक रहती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वजन घटाने से अक्सर स्लीप एपनिया के लक्षणों में सुधार किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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