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Ear Piercing: कान छिदवाने के बाद हो जाए घाव, तो ऐसे करें सही देखभाल

Thu, 15 Sep 2022 11:37 AM IST
स्वाति शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वाति शर्मा Updated Thu, 15 Sep 2022 11:37 AM IST
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Ear piercing: proper treatment can prevent the infection in hindi
कान में कई जगह पियर्सिंग करवाने का है चलन - फोटो : amar ujala

आभूषण हमेशा से श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। एक समय वह भी था जब महिलाएं केवल फूलों या लकड़ी, पत्थर आदि जैसे प्राकृतिक संसाधनों से बने गहने पहना करती थीं। फिर धीरे धीरे इनकी जगह कीमती धातुओं जैसे सोना, चांदी आदि ने लेना शुरु किया। समय के साथ आभूषणों को पहनने का तरीका और पसंद में भी बदलाव आया। नाक-कान छिदवाना या पियर्सिंग करवाना एक सामान्य प्रक्रिया रही है। यह नवजात शिशुओं के एक संस्कार के रूप में भी अपनाया जाता है और शौकिया रूप में स्त्री-पुरुष दोनों वयस्कों द्वारा भी। कई बार कान की पियर्सिंग करवाने के बाद एक छोटा घाव सा बन जाता है जिसके लिए ज्यादातर गर्म तेल और हल्दी लगाने की सलाह दी जाती है, लेकिन पर्याप्त ध्यान न दिए जाने पर यह घाव गंभीर रूप भी ले सकता है। 



स्किन का अधिक संवेदनशील होना, शरीर में किसी प्रकार की समस्या का मौजूद होना जिसकी वजह से घाव को ठीक होने में समय लगे या किसी प्रकार के संक्रमण की चपेट में आ जाना, ये वे कुछ कारण हैं जो कान के इस घाव को और खराब कर सकते हैं। इसलिए इन कुछ बातों का रखें ध्यान जब करवाएं इयर पियर्सिंग। 

Ear piercing: proper treatment can prevent the infection in hindi
ध्यान न देने पर बढ़ सकती है तकलीफ - फोटो : Pixabay

शरीर की सामान्य प्रक्रिया

आमतौर पर जब हमारे शरीर में कहीं भी कोई कट या चोट लगती है तो शरीर खुद से ही घाव को भरने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। शरीर जितना स्वस्थ होगा, यह प्रक्रिया उतनी ही तेज होगी। जब कान की नाजुक त्वचा को किसी मशीन या अन्य साधन की मदद से पंक्चर किया जाता है तो यह भी एक तरह का घाव बन जाता है। अब अगर आप कान की लौ यानी सबसे नरम, निचले हिस्से पर पियर्सिंग करवा रहे हैं तो दिक्कत उतनी नहीं होती लेकिन अगर कान की थोड़ी हार्ड वाली जगह जिसे पिन्ना कहा जाता है, उस पर दो-तीन जगह पियर्सिंग करवा रहे हैं तो इसे ठीक होने में समय लग सकता है। यहां चमड़ी कड़क होने और हड्डी के होने से दर्द भी ज्यादा हो सकता है। इसलिए इस जगह पर इंफेक्शन का खतरा भी अधिक होता है। कई बार तो कान छिदवाने के कई दिनों बाद, जब ऐसा लगता है कि घाव सूख रहा है, तब संक्रमण के लक्षण उभर सकते हैं। इस समय तुरंत उपचार करना जरूरी होता है। 

Ear piercing: proper treatment can prevent the infection in hindi
बैक्टीरिया बन सकता है संक्रमण का कारण - फोटो : Pixabay

दर्द से लेकर पस पड़ने तक 

कान छिदवाने के बाद कई लोगों को उस जगह पर या उसके आस पास एक उभार सा नजर आता है जिसे आम बोलचाल में मसूरी या फुंसी भी कहते हैं। यह असल में त्वचा के भीतर द्रव्य भर जाने से पैदा होती है और इसे ग्रेन्युलोमा कहा जाता है। इसके अलावा त्वचा पर लाली आना, दर्द होना, खुजली, जलन, पस पड़ जाना आदि लक्षण सामने आ सकते हैं। इन लक्षणों के उभरते ही तुरंत उपचार जरूरी है। ज्यादातर घरेलू उपचार से आराम मिलना शुरू हो सकता है। आमतौर पर सामान्य संक्रमण दो से ढाई हफ्तों के भीतर ठीक हो जाता है लेकिन यदि दो-तीन दिनों में आराम न हो तो तुरंत प्रोफेशनल मदद लेना जरूरी है, वरना संक्रमण बढ़कर अधिक गंभीर रूप ले सकता है। 

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नारियल तेल का प्रयोग भी देता है फायदा - फोटो : pixabay

घरेलू उपचार और आराम 

सामान्यतौर पर कान छिदवाने के बाद देशी इलाज के तौर पर हल्दी और गरम तेल का उपयोग किया जाता है। इससे दर्द में भी राहत मिलती है और घाव के ठीक होने की प्रक्रिया भी इससे तेज होती है। इसके अलावा कुछ लोग सॉल्ट वाटर यानी गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर भी घाव को साफ़ करते हैं। लेकिन यह अधिक पीड़ादायक हो सकता है। इसलिए इसके उपयोग को संभलकर करें। यदि घाव ज्यादा तकलीफ नहीं देता तो उसपर नारियल तेल लगाने से भी आराम मिल सकता है। हल्दी और नारियल तेल दोनों ही गुणकारी होते हैं। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन में एंटीऑक्सीडेंट्स व एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसके साथ ही यह शरीर पर बाहरी तत्वों के हमलों को रोकने और चोट या घाव को रिपेयर करने में भी मददगार होता है। इसी तरह नारियल तेल में कुछ प्रकार के बैक्टीरिया को पनपने से रोकने का गुण होता है, साथ ही यह त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसलिए संक्रमण को रोकने से लेकर चोट को ठीक करने तक में मदद करता है। 

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सही ऑइंटमेंट का उपयोग करें - फोटो : iStock

ऑइंटमेंट लगाएं 

घाव साफ़ करने के बाद उस पर कोई भी एंटीबैक्टीरियल ऑइंटमेंट लगाकर रुई से कवर करके रखें। यह घाव को सूखने और संक्रमण से बचाने में मदद करेगा। यदि आप ऑइंटमेंट को लेकर असमंजस में हैं तो डॉक्टर से सलाह लें क्योंकि कुछ लोगों को सभी ऑइंटमेंट सूट नहीं होते। इंफेक्शन जब तक ठीक न हो या घाव सूख न जाए तब तक घाव को साफ़ करके दिन में कम से कम दो-तीन बार ऑइंटमेंट लगाकर रुई लगाएं। 
घरेलू उपचार से सामान्यतः 2-3 हफ्तों में पूरी तरह आराम मिल सकता है। यदि आप घाव की शुरुआत से ही देखभाल करें और हाइजीन का पूरा ध्यान रखें तो। संक्रमण का बढ़ना या ठीक न होना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर में और भी कोई स्थिति मौजूद है जो घाव भरने की सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा डाल रही है। 

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