राजधानी दिल्ली सहित देश के कई राज्य इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। तापमान दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, सोमवार को दिल्ली के नजफगढ़ में तापमान 47 डिग्री से भी अधिक दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अगले एक हफ्ते तक तेज गर्मी और लू का प्रकोप जारी रह सकता है। जिस स्तर पर तापमान बढ़ता जा रहा है इससे सेहत को कई प्रकार से नुकसान होने का खतरा है।
Heatwave: आसमान से बरस रही 'आग' गर्भवती और बच्चों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक, ऐसे करें बचाव
शिशुओं और बच्चों को हीटवेव से बचाना जरूरी
आईएमडी ने देशभर में बढ़ते तापमान को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अत्यधिक गर्मी और आर्द्रता के कारण शिशुओं, बच्चों, गर्भवती और बुजुर्गों की सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है। गर्मी और लू की गंभीर स्थिति हीट स्ट्रोक का कारण बन सकती है जिसपर गंभीरता से ध्यान न दिया जाए तो ये कोमा और मृत्य के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। बच्चों की सेहत को लेकर परिजनों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
बच्चों की सेहत पर हो सकता है नकारात्मक असर
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सुरभि जयसवाल बताती हैं, शिशुओं और छोटे बच्चों में गर्मी से संबंधित बीमारियों का खतरा अधिक होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे अपने शरीर के तापमान को ठीक तरीके से नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। खुद को गर्मी से बचाने के लिए भी वह सक्षम नहीं होते हैं। बच्चों में अधिक गर्मी के कारण निर्जलीकरण और लू लगने का खतरा भी अधिक होता है।
डॉक्टर बताती हैं, कुछ अध्ययनों में ये भी पाया गया है कि अधिक तापमान बच्चों के मस्तिष्क स्वास्थ्य को भी प्रभावित करने वाला हो सकता है, इसलिए बच्चों को धूप के सीधे संपर्क में आने से बचाना जरूरी है।
गर्भवती बरतें विशेष सावधानी
बच्चों की ही तरह से गर्भवती के लिए भी अधिक तापमान कई प्रकार से जोखिम कारक हो सकता है। गर्मी और निर्जलीकरण से शिशु का वजन कम होने, समय से पहले जन्म और यहां तक कि मृत शिशु के जन्म का भी खतरा बढ़ सकता है। तेज गर्मी के कारण गर्भावस्था से संबंधित समस्याओं, जल्दी प्रसव पीड़ा होने के साथ गर्भकालीन मधुमेह और उच्च रक्तचाप होने का भी जोखिम काफी अधिक हो सकता है।
बच्चों-गर्भवती को कैसे रखें सुरक्षित?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ उपाय बताए हैं जिनकी मदद से बच्चों-गर्भवती को तेज धूप और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकता है।
- नियमित रूप से ध्यान रखें कि कहीं बच्चा प्यासा तो नहीं है, मुंह सूखा या सिरदर्द का अनुभव तो नहीं कर रहा है?
- बच्चे को तेज बुखार या चक्कर आ रहा है या फिर तेजी से सांस ले रहा है, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
- सुनिश्चित करें कि बच्चे को घमौरिया और अत्यधिक गर्मी से बचाने के लिए ढीले कपड़े पहनाए जाएं।
- स्तनपान कराने वाली माताओं को खूब पानी पीना चाहिए क्योंकि निर्जलीकरण स्तन के दूध उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
- गर्भवती के लिए जरूरी है कि आप खूब पानी पीती रहें और धूप के सीधे संपर्क में जाने से भी बचें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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