हमारे जीवन में रंग बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। रंग हम देखते तो आंखों से हैं, लेकिन इनका असर हमारे पूरे शरीर और स्वास्थ्य पर पड़ता है। कहा जाता है कि रंग अंतरात्मा की एक भाषा होते हैं। यह हमारे मूड और भावनाओं के साथ-साथ शरीर में ऊर्जा के प्रवाह और मात्रा को भी प्रभावित करते हैं। रंगों का एक प्रतीकात्मक अर्थ होता है, जिसे हमारी अवचेतना द्वारा तुरंत पहचान लिया जाता है, इसलिए रंगों का प्रभाव हमारी सेहत और धारणा पर भी पड़ता है।
कई अध्ययन में यह बात सामने आई है कि रंगों का हमारे स्वास्थ्य के साथ गंभीर संबंध है। यहां तक कि जब हम बीमार होते हैं या किसी तरह की शारीरिक परेशानी का सामना करते हैं, तब भी इससे बाहर निकलने में रंगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। किसी भी बीमारी के लिए दवा शुरू करने से पहले ही दवा का रंग, दवा और उपचार के बारे में लोगों की धारणा को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं का रंग पहले ही मरीजों के मन में एक धारणा बना देता है।
दरअसल, रंग, मस्तिष्क को दवा के वास्तविक कार्य के बारे में संदेश भेजता है। उदाहरण के लिए, अधिकांश लोग इस बात से सहमत होंगे कि रात की अच्छी नींद के लिए हल्के नीले रंग का कैप्सूल असरदार होता है। अब जरा गौर करें कि अगर कोई एसिडिटी से पीड़ित और उसे निऑन ग्रीन रंग का टैबलेट दिया जाए, तो शायद बहुत से मरीज इसे न लें, क्योंकि ज्यादातर लोग निऑन ग्रीन रंग को खट्टे स्वाद और साइट्रिक एसिड के साथ जोड़ते हैं और पेट की समस्या होने पर कोई भी ऐसी चीज लेना पसंद नहीं करेगा।
रोगी अपनी बीमारी के खिलाफ सर्वोत्तम प्रतिक्रिया तब देते हैं, जब रंग दवा के इच्छित परिणाम के साथ मेल खाता है। अलग-अलग रंगों का अलग-अलग प्रभाव होता है। उदाहरण के लिए, माना जाता है कि लाल रंग पल्स रेट, ब्लड प्रेशर और श्वास दर बढ़ाता है। इसलिए इस रंग का उपयोग अक्सर संचार स्थितियों के लिए किया जाता है। माना जाता है कि नीले या सफेद रंग से आराम और शांति मिलती है। इसलिए नीले रंग का उपयोग सिरदर्द, दर्द, ऐंठन, तनाव और अन्य परेशानियों के लिए किया जाता है।
अगर कोई मरीज डिप्रेशन में है और उसे महरून या गहरे भूरे रंग की एंटी-डिप्रेशन गोली दी जाती है, तो इसकी बहुत ज्यादा संभावना है कि रोगी इसे पसंद नहीं करेगा और यह दवा बीमारी को दूर करने में प्रभावी नहीं होगी। दरअसल, रोगी के आस-पास के रंग भी उसकी सेहत को काफी प्रभावित कर सकते हैं। शांत रंग अधिक सुकून प्रदान करते हैं। ब्लूज और ब्लू-ग्रीन्स वाली चीजें लोगों को सुकून देती हैं, क्योंकि वे शांति की भावना प्रदान करती हैं। इसलिए अस्पतालों की दीवारें अक्सर आरामदायक और सुकून देने वाले रंगों, जैसे कि सफेद और हल्के रंगों से पेंट की जाती हैं।
इसके अलावा वयस्क मरीजों के कमरों के रंग भी उनकी सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। जैसे कि उन कमरों के लिए लाल और पीले जैसे अति-चमकीले रंगों से बचना चाहिए, क्योंकि वे रंग चिंता और उत्सुकता को बढ़ाते हैं। वहीं बच्चों के अस्पताल में अधिक जीवंत रंगों, जैसे- पीले और नारंगी का उपयोग करने से युवा रोगियों को तनाव और चिंता को कम करने और ज्यादा आराम और खुशी महसूस करने में मदद कर सकते हैं।