4-7-8 breathing technique: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और एंजाइटी एक आम समस्या बन गई है, जिससे छुटकारा पाने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय अपनाते हैं। कई बार बेचैनी और घबराहट इतनी बढ़ जाती है कि समझ नहीं आता कि इसे तुरंत कैसे नियंत्रित किया जाए। ऐसी स्थिति में, सांसों पर आधारित एक सरल तकनीक आपके लिए 'हीलर' की तरह काम कर सकती है।
Health Tips: तनाव और एंजाइटी को दूर कर सकती है '4-7-8 ब्रीदिंग' तकनीक, कुछ ही मिनटों में मिलेगा आराम
आज की भागदौड़ भरी आधुनिक दिनचर्या में मानसिक तनाव होना बहुत आम बात है। लेकिन इस तनाव से छुटकारा पाना एक जटिल काम है। ऐसे में तनाव और एग्जाइटी से राहत पाने के लिए 4-7-8 श्वास तकनीक को अपना सकते हैं, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
क्या है '4-7-8 ब्रीदिंग' तकनीक?
यह सांस लेने और छोड़ने का एक विशेष तरीका है। इसमें सबसे पहले 4 सेकंड तक सांस लेना है, फिर 7 सेकंड तक उसे रोके रखना और 8 सेकंड तक उसे धीरे-धीरे छोड़ना है। इस तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 8 सेकंड की लंबी सांस छोड़ने की प्रक्रिया है।
यह प्रक्रिया पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करती है, जो शरीर के 'रेस्ट एंड डाइजेस्ट' मोड को शुरू करता है और 'फाइट और फ्लाइट' प्रतिक्रिया को तुरंत कम कर देता है, जिससे हृदय गति धीमी होती है और मन शांत होता है।
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कैसे करें इस तकनीक का अभ्यास?
इस तकनीक का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले एक शांत जगह पर आराम से बैठ या लेट जाएं और अपनी जीभ की नोक को ऊपर के दांतों के ठीक पीछे वाली जगह पर टिका लें। इस प्रक्रिया की शुरुआत में मुंह से 'व्हूश' की आवाज करते हुए सारी हवा बाहर निकालें। इसके बाद अपना मुंह बंद करें और नाक से धीरे-धीरे 4 तक गिनते हुए सांस अंदर भरें।
अब अपनी सांस को 7 सेकंड के लिए रोककर रखें और अंत में, 8 सेकंड तक गिनते हुए मुंह से फिर 'व्हूश' की आवाज के साथ सांस को पूरी तरह बाहर छोड़ दें। इतना करने के बाद एक साइकिल पूरा होता है, अब इस प्रक्रिया को कुल चार बार दोहराएं।
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जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारी सांसें छोटी और तेज हो जाती हैं। '4-7-8' तकनीक इस पैटर्न को तोड़ने में मदद करती है। 7 सेकंड तक सांस रोकने से शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन सोखने का अधिक समय मिलता है।
वहीं 8 सेकंड तक धीरे-धीरे सांस छोड़ने से रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड की अधिक मात्रा बाहर निकलती है, जो हृदय गति को धीमा कर मन को शांत करने में मदद करती है। यह तकनीक आपके दिमाग को चिंताओं से हटाकर सांसों की गिनती पर केंद्रित करती है, जिससे तुरंत राहत महसूस होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसके नियमित अभ्यास से दीर्घकालिक लाभ मिलते हैं। अगर आप क्रॉनिक मेंटल स्ट्रेस से परेशान हैं तो आपको काउंसलर की मदद लेनी चाहिए।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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