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Covid-19: ओमिक्रॉन की इस प्रकृति ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता, आधे से ज्यादा को पता ही नहीं कि वह संकमित थे

Sun, 21 Aug 2022 02:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 21 Aug 2022 02:26 PM IST
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half of Omicron infected not aware of their infection, new variant of coronavirus nature in hindi
कोरोना संक्रमितों को लेकर किया गया अध्ययन - फोटो : पीटीआई

कोरोना संक्रमण के मामले अब भी दुनियाभर के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं, विशेषकर समय के साथ आ रहे नए-नए वैरिएंट्स लोगों के लिए और भी कई प्रकार की मुसीबतें बढ़ा रहे हैं। फिलहाल भारत सहित ज्यादातर देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन और इनके सब-वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के मामले देखे जा रहे हैं।


पिछले 24 घंटे में देश में 11539 लोगों को संक्रमित पाया गया जबकि 34 की मौत हुई है। अध्ययनों में भले ही ओमिक्रॉन वैरिएंट्स को ज्यादा गंभीर समस्याओं का कारक न माना जाता रहा हो पर इसकी प्रकृति और संक्रामकता दर बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है। इसी को लेकर हाल ही में हुए एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने एक बड़ा खुलासा किया है।
 
अध्ययनकर्ताओं ने एक रिपोर्ट में बताया कि ओमिक्रॉन उन लोगों के लिए भी समस्याकारक है जिनको वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है या फिर जो हाल ही में संक्रमित रह कर ठीक हो चुके हैं, मतलब यह वैरिएंट शरीर में प्राकृतिक या वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा, दोनों को चकमा देकर लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसके अलावा इसके एसिम्टोमैटिक मामले और भी चिंता बढ़ाने वाले हैं।

हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि ओमिक्रॉन से संक्रमित आधे से अधिक लोगों को तो पता ही नहीं होता है कि वह संक्रमण का शिकार हैं। ऐसे लोगों से अन्य में संक्रमण होने का जोखिम अधिक हो सकता है, जो बड़ी आबादी में संक्रमण का खतरा बढ़ने का कारण हो सकता है। आइए इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।

half of Omicron infected not aware of their infection, new variant of coronavirus nature in hindi
संक्रमित लोगों को भी नहीं पता कि वह संक्रमण के शिकार हैं - फोटो : iStock

ज्यादातर लोग संक्रमण से अनजान

जामा नेटवर्क ओपन जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ओमिक्रॉन वैरिएंट की प्रकृति को लेकर चिंता जताई है। कोरोना के नए वैरिएंट्स और इसके कारण होने वाले जोखिमों को जानने के यह अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में शामिल ज्यादातर वयस्क हाल के संक्रमण से अनजान थे। अध्ययन में कुल 6385 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनमें से 264 प्रतिभागियों में ओमिक्रोन वैरिएंट  से संक्रमण की पुष्टि हुई।

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कोविड रिसर्च (सांकेतिक) - फोटो : पीटीआई

अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन में प्रतिभागियों से पूछताछ के दौरान पाया गया कि इनमें से केवल 44% प्रतिभागियों को संक्रमण के बारे में पता था, जबकि 56% इससे अनजान थे। जिन लोगों को संक्रमण होते हुए भी इसका पता नहीं चल पाया उनमें से 12 ने बताया कि उन्हें सामान्य सर्दी जैसी दिक्कतें तो थी पर इसपर उतना ध्यान नहीं दिया गया।

इस संबंध में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अध्ययन की रिपोर्ट पर दो बातें गौर करने वाली है।
पहला- ओमिक्रॉन के कारण गंभीर रोग के मामले बहुत कम हैं
दूसरा- संक्रमित होते हुए भी लोगों को इसका पता न चल पाने के कारण संक्रमण के प्रसार को खतरा अधिक हो सकता है।

अध्ययन की रिपोर्ट बताती है कि शामिल प्रतिभागियों में से ज्यादातर को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी थी।

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कोरोना के लक्षण कितने दिनों तक रहते हैं? - फोटो : iStock

5 दिनों से ज्यादा समय तक नहीं रहता है लक्षण

इंपीरियल कॉलेज लंदन द्वारा किए गए एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण की अवधि को लेकर जानकारी दी है। अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया है, यदि आप संक्रमित हो जाते हैं तो इसके ज्यादातर मामलों में लक्षण 5 दिनों के भीतर ही ठीक हो जाते हैं। सिर्फ एक-चौथाई  लोगों में देखा गया है कि सात दिनों के बाद तक भी संक्रामण जारी रह सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि आपको लगातार कुछ दिनों से सर्दी-जुकाम बना हुआ है तो इस स्थिति में बाहर जाने से बचें और मास्क लगाकर रखें, जिससे आसपास के लोगों को संक्रमण से बचाया जा सके। 

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कोरोना से बचाव के उपाय करते रहना अब भी जरूरी - फोटो : Pixabay

क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि भले ही कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर सामने आ रही रिपोर्ट में इसे हल्के लक्षणों वाला बताया जाता रहा है पर अगर इसकी प्रकृति को देखा जाए तो इस मामले में सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। कोरोना का संक्रमण अब भी जारी है, यह गया नहीं है ऐसे में आपकी लापरवाही आपके साथ अन्य लोगों के लिए भी समस्याओं का कारण बन सकती है। भले ही आपने वैक्सीनेशन करा लिया है फिर भी कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहें, जिस प्रकार से ओमिक्रॉन जैसे अति संक्रामक वैरिएंट्स देखे जा रहे हैं, ऐसे में इससे किसी को भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता है।  


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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