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शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखने का सपना हर किसी का होता है, पर इसमें सफलता कितने लोगों को मिल पाती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हाल के वर्षों में जीवनशैली की गड़बड़ी और खान-पान में पौष्टिकता कमी के कारण कई प्रकार के रोगों का खतरा बढ़ गया है। यही कारण है कि कम उम्र में ही लोगों को फेफड़े, हृदय, किडनी और लिवर से जुड़ी तमाम तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में लोगों में लिवर से जुड़ी बीमारी, फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ी है।
लिवर को शरीर का पावरहाउस कहा जाता है। लिवर, शरीर के अवांछित पदार्थों को फिल्टर करने के साथ आवश्यक पोषक तत्वों तथा पेय पदार्थों का प्रसंस्करण करता है। लेकिन अगर लिवर में फैट की मात्रा बढ़ने लगे तो इससे गंभीर नुकसान हो सकते हैं, फैटी लिवर ऐसी ही एक समस्या है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
फैटी लिवर डिजीज: गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है लिवर की यह बीमारी, जानिए इस बारे में विस्तार से
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फैटी लिवर के बारे में जानिए
डॉ. अनुकल्प बताते हैं, लिवर में फैट जमा होने के कारण यह समस्या होती है। फैट की मात्रा बढ़ने के कारण लिवर में सूजन और कुछ स्थितियों में लिवर काम करना बंद कर देता है। फैटी लिवर दो प्रकार के होते हैं- अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और दूसरा गैर अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज।
लिवर की बीमारियों के लिए वैसे तो शराब की आदत को मुख्य कारण माना जाता है, हालांकि गैर अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) की समस्या उन लोगों में भी हो सकती है जो शराब नहीं पीते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक फैटी लिवर के कई रोगियों में कोई भी लक्षण नजर नहीं आते जबकि कुछ लोगों को पेट में दाहिनी ओर दर्द हो सकता है। गंभीर स्थितियों में कुछ लोगों को सिरोसिस की समस्या भी हो सकती है, इसमें नाक से खून आना, थकान, वजन कम होना, पेट में सूजन और दर्द, पैरों में सूजन, पीली आंखें और भूख न लगने जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखते ही लोगों को विशेष सावधान हो जाने की आवश्यकता होती है।
- वजन घटना
- थकान और कमजोरी
- त्वचा में खुजली
- त्वचा और आंखों का पीलापन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लिवर में फैट जैसे पदार्थों को मेटाबोलाइज (रासायनिक प्रतिक्रिया) करने की क्षमता है, हालांकि जब फैट अत्यधिक मात्रा में जमा होने लगता है तो फैटी लिवर की समस्या होती है। यह समस्या आयु और जेनेटिक्स पर भी निर्भर करता है। इन स्थितियों को फैटी लिवर का मुख्य कारण माना जाता है।
- हाइपरटेंशन
- मोटापा
- डायबिटीज (मधुमेह)
- कोलस्ट्रॉल
- मेटाबोलिक गड़बड़ी
फैटी लिवर की समस्या का पता लगाने के लिए कुछ विशेष परीक्षणों की आवश्यकता होती है। इसमें मेडिकल हिस्ट्री, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, खून की जांच या लिवर की बायोप्सी कराने की जरूरत हो सकती है। जिन लोगों में फैटी लिवर का निदान होता है, उन्हें दवाइयों के साथ परहेज की आवश्यकता होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो फैटी लिवर के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं हैं, हालांकि इसके लक्षणों को कम करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं। जिन लोगों को यह समस्या होती है उन्हें जीवनशैली में बदलाव के साथ संतुलित आहार के सेवन की सलाह दी जाती है। पोषक तत्वों और विटामिन-ई से समृद्ध भोजन करने से लाभ मिलता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।