अलर्ट: आंखों का दर्द सिर्फ थकान नहीं, इन बीमारियों का भी हो सकता है संकेत
आंखों में दर्द कई कारणों से हो सकता है। थकान, लंबे समय तक स्क्रीन टाइम, धूल, एलर्जी, चोट और संक्रमण से दिक्कतें हो सकती है हैं। दर्द के साथ लालिमा, खुजली या सूजन हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
आंखों में दर्द के पीछे हो सकती हैं कई वजहें
आंखों में दर्द का एक ही कारण नहीं होता। कंजेक्टिवाइटिस यानी पिंक आई आंखों में दर्द और लालिमा की आम वजहों में शामिल है। इसके अलावा आंख पर चोट लगने से उसकी सतह को नुकसान पहुंच सकता है और दर्द शुरू हो सकता है। धूल, प्रदूषण और संक्रमण भी आंखों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ मामलों में आंखों में सूखापन या एलर्जी के कारण जलन और सूजन बढ़ सकती है। इसलिए दर्द के साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
थकान और स्क्रीन टाइम भी बन सकता है कारण
आज लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर और दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल आंखों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। लगातार काम करने से आंखों में थकान, दर्द, जलन और सूखापन महसूस हो सकता है। इसी तरह बहुत तेज रोशनी या लंबे समय तक अंधेरे में रहने से भी आंखों पर तनाव बढ़ सकता है। अगर काम के दौरान लगातार आंखों में परेशानी होती है तो बीच-बीच में स्क्रीन से नजर हटाना, पर्याप्त रोशनी रखना और आंखों को आराम देना मददगार हो सकता है।
धूल और एलर्जी से भी बढ़ सकती है सूजन
आंखों में धूल के कण जाने, प्रदूषण के संपर्क में आने या किसी एलर्जेन के कारण जलन और सूजन हो सकती है। इसके साथ खुजली, लालिमा, पानी आना और दर्द जैसी शिकायत भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में आंखों को बार-बार रगड़ने से समस्या और बढ़ सकती है। आंखों को साफ रखने और जलन पैदा करने वाली चीजों से दूरी बनाने पर ध्यान देना चाहिए। अगर लक्षण लगातार बने रहें या बढ़ने लगें तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
संक्रमण के संकेतों को बिल्कुल हल्के में न लें
आंखों को गंदे हाथों से छूने या रगड़ने से वायरस और बैक्टीरिया आंखों तक पहुंच सकते हैं। संक्रमण की शुरुआत लालिमा, हल्के दर्द, खुजली या आंखों से पानी आने जैसे लक्षणों से हो सकती है। कुछ संक्रमणों में बाद में सूजन और दूसरी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। इसलिए आंखों में संक्रमण के लक्षण दिखने पर खुद से दवा डालने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है। आंखें बेहद संवेदनशील होती हैं, इसलिए किसी भी लगातार या गंभीर समस्या में समय पर जांच कराना जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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