बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए रात में अच्छी नींद लेना बहुत आवश्यक माना जाता है। कई अध्ययनों में इस बात की पुष्टि की गई है कि जो लोग रात के समय नींद पूरी नहीं कर पाते हैं, उनमें कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नींद पूरी करने के साथ, हम किस तरीके और किस वातावरण में सोते हैं, इसका भी सेहत पर असर देखा गया है। अगर आपके बेडरूम का वातावरण सही नहीं है तो इससे न सिर्फ आपकी नींद व्याधित हो सकती है, साथ ही शरीर पर इसका नकारात्मक असर भी हो सकता है।
सावधान: लाइट ऑन करके सोने की आदत है नुकसानदायक, हृदय रोगों और डायबिटीज की बढ़ सकती है समस्या, विशेषज्ञों ने किया अलर्ट
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रात में रोशनी का सेहत पर असर
अमेरिका स्थित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, सोते समय कमरे में अंधेरा रखना, आपकी सेहत के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है। कम रोशनी भी नींद के दौरान कार्डियोवैस्कुलर फंक्शन को नुकसान पहुंचा सकती है और अगली सुबह इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ा सकती है। ऐसे में यह हृदय और डायबिटीज, दोनों ही तरह के रोगों को बढ़ावा दे सकती है। अच्छी नींद लेने के साथ बेडरूम का वातावरण भी आपकी शारीरिक-मानसिक सेहत पर असर डालता है।
कार्डियोवैस्कुलर फंक्शन पर प्रतिकूल प्रभाव
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि रात के समय मध्यम प्रकाश के संपर्क में आने से भी शरीर की सक्रियता बढ़ जाती है। यह स्थिति हृदय गति, हृदय के सिकुड़ने की गति और रक्त वाहिकाओं में ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाहित होने की दर भी काफी बढ़ा देती है। शरीर चूंकि नींद में अचेतन अवस्था में होता है ऐसे में इन बढ़ी हुई गति के कारण कार्डियोवैस्कुलर फंक्शन पर प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है। रात में बेडरूम की मध्यम रोशनी भी आपमें हृदय रोगों के खतरे को बढ़ावा दे सकती है।
ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या
हृदय के साथ-साथ सोते समय रोशनी का इंसुलिन पर भी असर देखा गया। जांचकर्ताओं ने पाया कि जो लोग हल्की रोशनी में भी सोते हैं उनमें सुबह इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ा हुआ रहता है।
इंसुलिन प्रतिरोध, उस स्थिति को कहा जाता है जब मांसपेशियों और लिवर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति अच्छी तरह से प्रतिक्रिया नहीं करती हैं। इस स्थिति में ऊर्जा के लिए रक्त से ग्लूकोज का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाता है, जिसके कारण ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है। यानि कि रात में सोते समय हल्की रोशनी भी आपमें हृदय रोग और डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकती है।
सोते समय रखें अनुकूल वातावरण
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ डेनिएला ग्रिमाल्डी कहती हैं, भले ही आप सो रहे हों, पर ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम सक्रिय रहता है। आमतौर पर दिन के समय हृदय गति सामान्य और रात के समय कम रहना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है, पर सोते समय इसका बढ़ जाना आपके लिए समस्याओं का कारण बन सकता है। सभी लोगों को रात में सोते समय कमरे के वातावरण को सोने के अनुकूल बनाकर रखना चाहिए।