कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच इसको लेकर नए-नए शोध अध्ययन सामने आ रहे हैं। किसी भी बीमारी के संक्रमण के बाद शरीर में एंटीबॉडीज बनती है, जिसके जरिए शरीर उस बीमारी से लड़ता है।वैक्सीन भी शरीर में ऐसी ही एंटीबॉडीज पैदा करता है। कोरोना वायरस के मामले में एंटीबॉडी को लेकर ही एक नए शोध अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है कि महिलाओं के मुकाबले यह पुरुषों में ज्यादा बन रही है। पुर्तगाल के शोधकर्ताओं ने अपने शोध अध्ययन में यह दावा किया है। इसके साथ ही शेध में यह भी कहा गया है कि 90 फीसदी मरीजों में एंटीबॉडीज सात महीने तक रहती है।
2 of 6
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
यूरोपियन जर्नल ऑफ इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित शोध अध्ययन के मुताबिक, पुर्तगाल के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि महिलाओं के शरीर की तुलना में पुरुषों के शरीर में एंटीबॉडीज ज्यादा बनती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि शरीर में एंटीबॉडीज कितनी मात्रा में बनेंगी, इसके पीछे उम्र बड़ा कारक नहीं है। व्यक्ति में कोरोना संक्रमण का स्तर कितना गंभीर रहा है, यही तय करता है कि उसके शरीर में एंटीबॉडी का स्तर कितना होगा।
3 of 6
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
एंटीबॉडी होती क्या है?
एंटीबॉडी दरअसल प्रोटीन से बनीं खास तरह की इम्यून कोशिकाएं होती हैं, जिसे बी-लिम्फोसाइट कहा जाता है। जब भी शरीर में कोई बाहरी चीज या संक्रमण पहुंचता है तो ये सावधान हो जाती है। एंटीबॉडीज ही बैक्टीरिया या वायरस के विषैले तत्वों को निष्क्रिय करने का काम करती हैं। एंटीबॉडीज शरीर को हर तरह के रोगाणुओं से बचाती है।
4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों का दावा है कि 90 फीसदी मरीजों में ये एंटीबॉडीज संक्रमण के बाद अगले सात महीने तक रहती हैं। पुर्तगाल के शोधकर्ता मार्क वेल्धोएन का कहना है, हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम कोरोना वायरस को पहले समझता है और फिर इससे लड़ने के लिए एंटीबॉडीज रिलीज करता है। ये एंटीबॉडीज वायरस से लड़ने में मदद करती हैं।
5 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
मरीजों में एंटीबॉडीज किस हद तक बनीं, इसे समझने के लिए 300 कोरोना मरीजों का सीरोलॉजी टेस्ट किया गया। मरीजों पर अगले छघ्ह माह तक नजर रखी गई। रिपोर्ट में सामने आया कि कोरोना के लक्षण दिखने के बाद पहले तीन हफ्तों के अंदर एंटीबॉडीज का स्तर बढ़ा। हालांकि एक स्तर तक पहुंचने के बाद इनकी संख्या कम हुई।