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World Thalassemia Day: बच्चों के लिए खतरनाक बीमारी है थैलेसीमिया, जानें इसके लक्षण, कारण और उपाय

Thu, 07 May 2020 11:37 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Thu, 07 May 2020 11:37 PM IST
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Everything You Need to Know About Thalassemia causes, symptoms and treatment
वर्ल्ड थैलेसिमिया डे (सांकेतिक तस्वीर)

आठ मई को हर साल वर्ल्ड थैलेसिमिया डे मनाया जाता है। इसके पीछे का उद्देश्य लोगों को रक्त संबंधित इस गंभीर बीमारी थैलेसीमिया के प्रति जागरुक करना है। थैलेसीमिया मुख्यत: एक जेनेटिक यानी अनुवांशिक बीमारी है जो माता-पिता से उनके बच्चों में होती है। इस बीमारी में बच्चों में खून की कमी होने लगती है, जो कि सेहत के लिए बहुत हानिकारक होता है। विश्व थैलेसीमिया दिवस पर  विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाएं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती हैं। हालांकि कोरोना संकट के कारण दुनियाभर के कई देशों में लॉकडाउन चल रहा है और इस कारण बहुत सारी जगहों पर कार्यक्रम संभव नहीं हैं। लेकिन इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए आज हम आपकों बता रहे हैं कि थैलेसीमिया क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है। 

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World Thalassemia Day

थैलेसीमिया ब्लड से जुड़ी एक जेनेटिक बीमारी है। सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में आरबीसी यानी लाल रक्त कणों की संख्या 45 से 50 लाख प्रति घन मिलीमीटर होती है। थैलीसीमिया बीमारी में ये आरबीसी तेजी से नष्ट होने लगते हैं और नई कोशिकाएं नहीं बन पाती है। सामान्य तौर पर लाल रक्त कणों की औसतन आयु 120 दिन होती है जो इस बीमारी में घटकर करीब 10 से 25 दिन ही रह जाती है। इसके कारण शरीर में खून की कमी होने लगती है और इस कारण होने वाली बीमारियां व्यक्ति को शिकार बना लेती हैं। 

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ब्लड टेस्ट

थैलेसीमिया के लक्षण

  • यह एक जेनेटिक बीमारी है। इसलिए जन्म के 6 महीने बाद ही बच्चों में ये लक्षण तेजी से दिखने लगते हैं।
  • बच्चों के नाखून और जीभ में पीलेपन की शिकायत
  • बच्चों की ग्रोथ यानी विकास रुक जाना, कुपोषण
  • उनका वजन ना बढ़ना, कमजोरी जैसी शिकायतें 
  • सांस लेने में तकलीफ, थकान रहना
  • पेट की सूजन, गाढ़ा मूत्र जैसी शिकायतें आदि
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vegetables - फोटो : pixa

क्या करें, क्या न करें

  • इस बीमारी से बचने के लिए व्यक्ति को कम वसा वाली चीजें खानी चाहिए।
  • हरी पत्तेदारी सब्जियां और आयरन युक्त फूड्स का सेवन करना चाहिए।
  • नियमित योग और व्यायाम करने से भी इस बीमारी से बचाव होता है।
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blood test
  • ब्लड टेस्ट करवाना जरूरी

थैलेसीमिया से बचाव के लिए समय-समय पर माता-पिता को ब्लड टेस्ट करवाते रहना चाहिए। बच्चा होने के बाद उसका भी ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए। साथ ही प्रेग्नेंसी के चार महीने के बाद भ्रूण की स्थिति की जांच करवानी चाहिए। डॉक्टर बताते हैं कि युवाओं को शादी से पहले ब्लड टेस्ट करवा लेना चाहिए। 

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