Medically Reviewed by Dr. Rewa Maheshwari
ज्यादा आम खाने से होते हैं ये नुकसान, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
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मुंहासों का निकलना
आम एक ऐसा फल है जिसकी तासीर बहुत गर्म होती है इसलिए इसका सेवन बहुत संतुलित मात्रा में करना चाहिए। कई बार हमें पता ही नहीं होता है और स्वाद- स्वाद में हम जमकर आम खा लेते हैं और फिर 1-2 दिन में ही हमारे चेहरे पर मुंहासे निकलने लगते हैं। आम से बहुत जल्दी शरीर में गर्मी बढ़ती है इसलिए रोज तो इसका सेवन न ही करें और जब भी आम खा रहे हैं तो थोड़ी- थोड़ी मात्रा में इसे खाएं।
ब्लड- शुगर लेवल का बढ़ना
डायबिटीज के मरीजों को तो आम का लालच करना ही नहीं चाहिए। आम में पहली ही बहुत अधिक मिठास होती है, ऐसे में इसे खाने से अचानक ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। आमरस का सेवन तो मधुमेह रोगियों के लिए और भी मुश्किल खड़ी कर सकता है क्योंकि पहले ही आम अपने आप में बहुत मीठा होता है और रस या शेक में इसमें कृत्रिम शक्कर भी मिलाई जाती है जो कि ब्लड शुगर लेवल को बहुत जल्दी असंतुलित कर देती है।
दस्त लगना
आम खाने से दस्त लगने की समस्या भी हो जाती है। अक्सर यह समस्या बच्चों को अधिक होती है इसलिए बच्चे यदि आम खा रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा मात्रा में वे आम न खाएं। आम के फल में बहुत अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है और शरीर में जिस प्रकार फाइबर की कमी से कब्ज हो सकती है, ठीक उसी प्रकार यदि फाइबर का अधिक सेवन कर लिया जाए तो दस्त भी लग सकती है इसलिए सोच-समझकर ही इनका सेवन करें।
वजन बढ़ना
आम के अधिक सेवन से वजन अचानक बढ़ सकता है क्योंकि आम में बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी पाई जाती है। यदि आप किसी डाइट रूटीन का पालन कर रहे हैं या वजन घटाने के लिए प्रयासरत हैं, ऐसे में यदि आपने आम खा लिया तो आपकी सारी डाइट और कसरत बराबर हो जाएगी इसलिए कोशिश करें कि यदि आम खाना ही है तो सिर्फ स्वाद के लिए खाएं, उससे पेट भरने की कोशिश करेंगे तो मोटापा बढ़ने लगेगा।
नोट- यह लेख अर्पण हॉस्पिटल की सीनियर न्यूट्रीशनिस्ट डॉक्टर रेवा माहेश्वरी से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर रेवा को इस क्षेत्र में पिछले 9 वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपनी डिग्री जी.बी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एवंं टेक्नोलॉजी, पंतनगर से ली है।
अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।