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चेतावनी: शुगर घटाने वाली दवा ही बन रही डायबिटीज रोगियों के लिए खतरनाक? रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

Sat, 05 Sep 2026 10:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 05 Sep 2026 10:03 PM IST
सार

टाइप-2 डायबिटीज में इस्तेमाल होने वाली SGLT2 इन्हिबटर्स दवाओं को लेकर नई रिसर्च में कीटोएसिडोसिस के जोखिम को बढ़ाने वाला पाया गया है। कीटोएसिडोसिस गंभीर स्थितियों में जानलेवा समस्याओं का कारण भी बन सकती है। शोधकर्ताओं ने डॉक्टरों को इस दवा को लिखने से पहले मरीज की पूरी हेल्थ हिस्ट्री चेक करने का सलाह दी है। 

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study says type 2 diabetes SGLT2 inhibitors medicine may trigger ketoacidosis diabetic attack
डायबिटीज की दवाओं को लेकर अलर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

दुनियाभर में 20-80 की उम्र के लगभग 83 करोड़ लोग (इस आयु वालों की आबादी का लगभग 11.1%) डायबिटीज का शिकार हैं। ये बीमारी भले ही खून में ग्लूकोज बढ़ने तक ही जानी जाती रही है, पर समय के साथ इससे हार्ट, आंखों की रोशनी, किडनी, मेटाबॉलिज्म और तंत्रिकाओं को भी खतरा हो सकता है। जिन लोगों का शुगर लेवल अक्सर बढ़ा हुआ रहता है, डॉक्टर उन्हें दवाएं या जरूरत पड़ने पर इंसुलिन के इंजेक्शन दे सकते हैं।

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डायबिटीज की दवा का मकसद ब्लड शुगर को नियंत्रित करना और मरीजों को बीमारी की जटिलताओं से बचाना होता है। लेकिन अब एक हालिया अध्ययन ने डायबिटीज की कुछ दवाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कुछ मरीजों में डायबिटीज की दवाओं, विशेषतौर पर SGLT2 इन्हिबटर दवाओं के गंभीर साइड-इफेक्ट्स देखे गए हैं। ये ऐसी दवाएं हैं जो टाइप-2 डायबिटीज में शुगर को कम करने के लिए अतिरिक्त शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती हैं। इनका इस्तेमाल केवल डायबिटीज तक सीमित नहीं है। हार्ट फेलियर और किडनी की बीमारी से जुड़े मरीजों को भी इनसे फायदा मिल सकता है। 
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लेकिन स्वीडन के शोधकर्ताओं ने रिसर्च ने बताया है कि कुछ परिस्थितियों में इन दवाओं से डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का खतरा हो सकता है। जिन लोगों के पहले से डायबिटीज के साथ किडनी की समस्या है या वजन बहुत कम है ऐसे लोगों में इसका खतरा ज्यादा देखा गया है। वैज्ञानिकों की टीम ने डॉक्टरों को भी इस दवा को लिखते समय मरीज की पूरी हिस्ट्री जांच लेने की सलाह दी है।

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डायबिटीज की दवाओं से किडनी को हो सकता है खतरा - फोटो : Adobe stock

डायबिटीज की दवा से कीटोएसिडोसिस का खतरा

आंकड़ों से पता चलता है कि टाइप-2 डायबिटीज के लाखों मरीज इस दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ लोगों में इससे कीटोएसिडोसिस के खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है। इसे आम भाषा में एक तरह का गंभीर डायबिटिक अटैक कहा जा सकता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब खून में कीटोन्स नाम के हानिकारक पदार्थ जरूरत से ज्यादा जमा होने लगते हैं। 

कीटोन्स उस समय बनते हैं जब शरीर ऊर्जा के लिए ग्लूकोज की जगह फैट को ज्यादा बर्न करने लगता है। कीटोन्स का स्तर बहुत बढ़ जाने पर शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है और स्थिति जानलेवा हो सकती है।
 

  • डायबिटीज यूके की रिपोर्ट के अनुसार, टाइप-2 वाले करीब 10 फीसदी लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएआई) कम होता है।
  • विशेषज्ञ पहले भी चिंता जता चुके हैं कि SGLT2 दवाएं शरीर में ऊर्जा के लिए फैट बर्न करने को बढ़ावा दे सकती हैं।
  • यही कारण है कि कुछ अध्ययनों में इससे वेट लॉस में भी फायदे देखे गए थे।
  • हालांकि इससे शरीर में कीटोन्स बनने की मात्रा बढ़ सकती है और गंभीर स्थितियों में कीटोएसिडोसिस हो सकता है।


यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब एक अलग शोध में ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों में कीटोएसिडोसिस से होने वाली मौतों में बढ़ोतरी की बात सामने आई है।

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कीटोएसिडोसिस का खतरा - फोटो : Adobe Stock Images

अध्ययन में क्या पता चला?

द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन
में कहा गया है कि SGLT2 इन्हिबटर दवाएं ज्यादा जोखिम वाले टाइप-2 डायबिटीज मरीजों में कीटोएसिडोसिस को ट्रिगर कर सकती हैं। ये दवाएं टाइप-2 डायबिटीज के करीब एक-तिहाई मरीजों को दी जाती हैं।

शोधकर्ताओं ने स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट से जुड़े अध्ययन में करीब 2.8 लाख टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के हेल्थ रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इन मरीजों को इन्हिबटर दवाएं दी जा रही थीं।
 

  • शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन मरीजों को पहले कभी कीटोएसिडोसिस हो चुका था, उनमें इसका खतरा ज्यादा था। 
  • इसके अलावा ब्लड शुगर का बहुत ज्यादा रहना, वजन कम होना और शरीर में पोषण की कमी भी गंभीर जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
  • जिन मरीजों को पहले हाइपोग्लाइसीमिया यानी लो ब्लड शुगर बहुत की दिक्कत थी, उनमें भी कीटोएसिडोसिस का खतरा ज्यादा देखा गया।


शोधकर्ताओं के मुताबिक, डायबिटीज के दौरान किसी तरह का संक्रमण कीटोएसिडोसिस शुरू होने का सबसे आम कारण था। इसके अलावा कीटोएसिडोसिस की समस्या वाले लोगों में किडनी फेलियर, स्ट्रोक का जोखिम भी ज्यादा पाया गया।

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डायबिटीज की दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी जरूरी - फोटो : Adobe Stock Images

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर पीटर उएडा कहते हैं,  SGLT2 इन्हिबटर्स से बहुत से मरीजों को लाभ मिलता है, पर मरीज के लिए ये दवाएं देते समय डॉक्टर को उसकी दूसरी समस्याओं पर भी जरूर ध्यान देना चाहिए।

प्रोफेसर उएडा कहते हैं, ये रिसर्च यह नहीं कहती है कि इलाज के लिए अब इन दवाओं का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। बल्कि डॉक्टरों को ऐसे मरीजों को पहले पहचानना जरूरी है जिनमें जोखिम ज्यादा है, ताकि इन दवाओं का ज्यादा सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।

इससे पहले इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने पाया था कि कई देशों में कीटोएसिडोसिस के मामलों में 2015-2023 के बीच 81 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इस स्थिति में मरीज को अक्सर बहुत ज्यादा प्यास लगने और सामान्य से अधिक बार पेशाब जाने जैसी दिक्कत होने लगती है। कुछ लोगों को पेट में दर्द, जी मिचलाने, उल्टी और धुंधला दिखाई देना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

डायबिटीज के मरीजों में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इसे सामान्य कमजोरी या शुगर की समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से इसकी गंभीरता और खतरे को कम किया जा सकता है।



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स्रोत:
Ketoacidosis with SGLT2 inhibitors in routine clinical practice of type 2 diabetes: Scandinavian cohort and nested case–control study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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