फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

विशेषज्ञों ने बताया: डायबिटीज-हृदय रोगों का है गहरा संबंध, हार्ट फेलियर तक का हो सकता है खतरा, बरतें सावधानी

Thu, 20 Oct 2022 05:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 20 Oct 2022 05:00 PM IST
विज्ञापन
diabetes increases the risk of heart failure, know its risk and prevention in hindi
हृदय रोगों का बढ़ता खतरा और बचाव - फोटो : istock

वैश्विक स्तर पर पिछले कुछ वर्षों में जिन बीमारियों का जोखिम सबसे ज्यादा बढ़ता हुआ देखा गया है, डायबिटीज और हृदय रोग उनमें शीर्ष पर हैं। लाइफस्टाइल और आहार से संबंधित गड़बड़ी के कारण साल-दर-साल इन रोगों के शिकार लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। साल 2021 के आंकड़ों के अनुसार 20-79 की आयु वाले 537 मिलियन (53.7 करोड़) से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित थे। वहीं दुनियाभर में हृदय रोगों को मृत्य के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है, यह वैश्विक स्तर पर हर साल 1.79 करोड़ से अधिक लोगों के मौत का कारण बन रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी उम्र के लोगों को इन दोनों बेहद खतरनाक बीमारियों से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज एक क्रोनिक समस्या है, जो शरीर के कई अंगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है, इसे हृदय रोगों के भी एक प्रमुक कारण के तौर पर जाना जाता है।

अध्ययन बताते हैं कि डायबिटीज के शिकार लोगों में समय के साथ हृदय रोगों के विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है। जिन लोगों को मधुमेह की समस्या है उन्हें हृदय रोगों से बचाव करते रहने की आवश्यकता है। आइए जानते हैं कि ये दोनों बीमारियों किस प्रकार से एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और इनसे बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए?

diabetes increases the risk of heart failure, know its risk and prevention in hindi
टाइप-2 डायबिटीज की समस्या - फोटो : istock

डायबिटीज रोगियों में हृदय की बीमारियों का खतरा

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनमें समय के साथ हृदय रोगों के विकसित होने का जोखिम हो सकता है। वहीं यदि आपमें पहले से ही हृदय रोगों का जोखिम जैसे मोटापा, कोलेस्ट्रॉल या आनुवांशिकता है तो यह जोखिम और भी बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हाई ब्लड शुगर की स्थिति रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है, जिसके कारण रक्त का प्रवाह भी प्रभावित हो जाता है और हृदय को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता है। यह स्थिति हृदय के लिए समस्याओं को बढ़ा देती है। रक्त वाहिकाओं को होने वाली क्षति के कारण मैक्रोवास्कुलर डिजीज का जोखिम बढ़ जाता है।

diabetes increases the risk of heart failure, know its risk and prevention in hindi
डायबिटीज के रोगियों में मैक्रोवास्कुलर डिजीज की समस्या - फोटो : istock

मैक्रोवास्कुलर डिजीज बढ़ा देती है जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज के रोगियों में मैक्रोवास्कुलर डिजीज की समस्या काफी सामान्य देखी गई है। यह मुख्यरूप से कोरोनरी आर्टरी, पेरिफेरल आर्टरी और सेरेब्रोवास्कुलचर को प्रभावित करने वाली स्थिति है। प्रारंभिक स्थिति में मैक्रोवास्कुलर डिजीज हृदय, मस्तिष्क और अन्य अंगों को रक्त की आपूर्ति करने वाले वाहिका में प्लाक का बन सकती है। जिन लोगों को डायबिटीज होता है उन्हें इस प्रकार की समस्याओं के बारे में डॉक्टर से सलाह लेते हुए बचाव करते रहना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
diabetes increases the risk of heart failure, know its risk and prevention in hindi
हार्ट फेलियर की दिक्कतों से करें बचाव - फोटो : istock

हार्ट फेलियर का जोखिम होता है अधिक

टाइप-2 डायबिटीज वाले अधिकांश लोगों में हृदय रोग विकसित होने का जोखिम अधिक देखा गया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) कहता है, सभी डायबिटिक रोगियों को हृदय की जांच जरूर करते रहना चाहिए। इससे समय रहते उनमें जोखिमों का पता लगाकर इलाज किया जा सकता है। कार्डियोवास्कुलर डायबेटोलॉजी जर्नल में प्रकाशित साल 2021 के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में हार्ट फेलियर के मामले भी अधिक हो सकते हैं। इस प्रकार के डायबिटीज वाले 30 फीसदी रोगियों में हार्ट फेलियर का खतरा रहता है। 

विज्ञापन
diabetes increases the risk of heart failure, know its risk and prevention in hindi
डायबिटीज में बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता - फोटो : iStock

इन समस्याओं से बचाव के लिए क्या करें?

डॉक्टर्स कहते हैं, आनुवांशिकता के अलावा डायबिटीज और हृदय रोगों के लिए लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी को प्रमुख कारण माना जाता रहा है। इन दोनों रोगों का खतरा अब कम आयु वालों में भी देखा जा रहा है, ऐसे में सभी लोगों को बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। चीनी-नमक के अधिक सेवन से बचने के साथ दिनचर्या में नियमित व्यायाम को शामिल करके इन दोनों रोगों के खतरे को कम किया जा सकता है। अध्ययन बताते हैं कि सप्ताह  में 150 मिनट तक के व्यायाम की आदत बनाकर हृदय रोगों के जोखिम को 40 फीसदी तक कम करने में मदद मिल सकती है।



----------------

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed