डॉ. कीर्तिमान सिंह,
दिल का सही लय और ताल में धड़कते रहना अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। पिछले कुछ महीनों में कई कम उम्र लोगों के हार्ट अटैक से गुजर जाने की खबरें सुर्खियां बनीं। इनमें से अधिकांश न केवल फिटनेस को लेकर संजीदा थे बल्कि नियमित व्यायाम और हेल्दी डाइट भी उनके रूटीन का हिस्सा थी। इसके बावजूद वे बच नहीं पाए। इसका एक साफ़ मतलब यही है कि दिल की अच्छी सेहत के लिए केवल फिटनेस एकमात्र उपाय नहीं होती। इसके अलावा भी आपको कई चीजों पर ध्यान देना जरूरी होता है। यही नहीं जरूरत से ज्यादा व्यायाम भी खतरनाक हो सकता है यह भी एक तथ्य है।
जाहिर है कि पिछले एक दशक में स्वास्थ्य के प्रति लोगों में सजगता बढ़ी है लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसको केवल जिम और खान-पान से जोड़कर ही देखा है। जबकि स्वास्थ्य संबंधी जांचें और बीमारियों के लक्षणों को लेकर भी सही जानकारी होना जरूरी है। इसके आधार पर आपको इलाज पाने और जान बचाने में सहायता मिल सकती है। हार्ट अटैक या दिल के रोगों के मामले में भी यही बात ध्यान रखने लायक है। इसी कड़ी में जानिए क्या है कार्डियक ट्रोपोनिन टेस्ट और इसकी जरूरत कब और क्यों पड़ती है।
Cardiac Health: क्या है कार्डियक ट्रोपोनिन टेस्ट? विशेषज्ञ से जानें कब और क्यों है ये जरूरी
दिल के काम में आती बाधा
मनुष्य के दिल का काम होता है खून और उसके साथ ऑक्सीजन को पंप करके सुचारू रूप से पूरे शरीर में संचारित करते रहना यानी शरीर के भीतर खून को हर अंग तक पहुंचाने के लिए लगातार काम करना। प्रकृति ने यह व्यवस्था इस प्रकार बनाई है कि आपके सोते -जागते, चलते-बैठते हर स्थिति में दिल निरंतर काम करता रहता है। स्थिति तब गड़बड़ाने लगती हैं जब दिल की इस प्रक्रिया में बाधा आने लगती है। जब खून और ऑक्सीजन सही तरीके से शरीर में नहीं पहुंचती तो केवल ह्रदय ही नहीं पूरे शरीर की सेहत पर बुरा असर पड़ने लगता है। इसी तरह पनपते हैं ह्रदय रोग भी।
ऐसे होती है मदद
कार्डियक समस्याओं को लेकर लोगों में पहले से अधिक सजगता तो आई है लेकिन अब भी लोग इसके बारे में आधी-अधूरी जानकारी ही रखते हैं। यही कारण है कि ज्यादातर लोगों को हृदय रोगों के बारे में तब पता चलता है जब कोई लक्षण गंभीरता से सामने आता है। कई बार लक्षण सामने आने पर भी व्यक्ति समझ नहीं पाता। लेकिन यदि थोड़ी सतर्कता रखकर समय पर डॉक्टर के पास पहुंच सकें तो जान बचाने में मदद मिल सकती है। कार्डियक ट्रोपोनिन टेस्ट ऐसी ही स्थिति में मददगार साबित होता है। यह टेस्ट हृदय की मांसपेशियों में होने वाली क्षति का पता लगाता है। इससे हार्ट अटैक की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। डॉक्टर अक्सर शारीरिक परीक्षण के बाद आशंका होने पर इस टेस्ट की सलाह देते हैं। यदि किसी व्यक्ति में सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, तेज पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
क्या है ट्रोपोनिन?
खून को पंप करने की प्रक्रिया में दिल सिकुड़ता और फूलता है। ट्रोपोनिन वे प्रोटीन हैं जो कार्डियक और स्केलेटल मसल्स के संकुचन में सहायता करते हैं। स्केलेटल मसल्स वे हैं जो शरीर के कई हिस्सों में संचालन का काम करती हैं। जबकि कार्डियक मसल्स मिलकर दिल की दीवार बनाती हैं। इन दोनों ही प्रकार की मांसपेशियों में तीनों प्रमुख ट्रोपोनिन उपस्थित होते हैं। मुख्यतः ट्रोपोनिन के तीन प्रकार होते हैं- ट्रोपोनिन सी, आई और टी। इनमें से मुख्यतः ट्रोपोनिन टी और आई को ह्रदय में हुई क्षति को समझने के लिए जांचा जाता है।
ऐसे होती है जांच
इस जांच के अंतर्गत खून में ट्रोपोनिन के स्तर को मापा जाता है। ट्रोपोनिन की मात्रा रक्त में तब ही दिखाई देती हैं जब हार्ट की मसल्स को क्षति पहुंच चुकी होती है, अर्थात हार्ट अटैक की स्थिति में। हालांकि खून में ट्रोपोनिन की मात्रा के बढ़ने के कुछ कारण और भी हो सकते हैं लेकिन हार्ट अटैक इनमें सबसे आम है। ख़ास बात यह है कि इसके लिए पहले भी जांचें की जाती थीं लेकिन वे खून में ट्रोपोनिन के कम होते स्तर को पकड़ नहीं पाती थीं। अब इसके लिए एडवांस्ड जांचें उपलब्ध हैं। हाई सेंसिटिविटी कार्डियक ट्रोपोनिन जांच से तो शुरूआती 3 घंटों में लगभग 100 प्रतिशत तक सही परिणाम मिल सकते हैं।