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Post Covid: कोरोना महामारी का स्वास्थ्य पर असर, क्यों बढ़ गए हार्ट अटैक के मामले? विशेषज्ञ ने किया बड़ा खुलासा

Thu, 11 Apr 2024 01:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 11 Apr 2024 01:41 PM IST
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covid recovered people facing low immunity and increased viral infections risk
कोरोना के बाद बढ़ी स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : istock

साल 2019 के आखिर में दुनियाभर में शुरू हुई कोरोना महामारी ने हमारी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। संक्रमण की रफ्तार भले ही अब काफी नियंत्रित है पर बड़ी संख्या में अब भी लोगों में पोस्ट कोविड और इससे संबंधित स्वास्थ्य जोखिम देखे जा रहे हैं। कुछ अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि पहले की तुलना में अब स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार की चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। अब कई संक्रामक बीमारियों के गंभीर रूप देखे जा रहे हैं, जिसने स्वास्थ्य क्षेत्र पर बड़ा बोझ डाल दिया है।



महामारी के दौरान ब्लैक फंगस संक्रमण, मंकीपॉक्स के कारण भी बड़ी संख्या में लोगों को परेशान देखा गया, वहीं शोधकर्ता बताते हैं कि पहले की तुलना में अब लोगों में इम्युनिटी की समस्याएं भी बढ़ी हुई देखी जा रही हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि महामारी के बाद हमारी सेहत में किस तरह का परिवर्तन आया है? किन बीमारियों को लेकर डॉक्टर्स काफी चिंतित हैं।

covid recovered people facing low immunity and increased viral infections risk
संक्रमण का बढ़ा खतरा - फोटो : पेक्सेल्स

कमजोर हो गई है लोगों को प्रतिरक्षा प्रणाली

कोरोना के बाद बढ़ी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर एम्स दिल्ली में बाल विभाग की सर्जन डॉ. शिल्पा शर्मा ने बताया कि कोरोना महामारी ने कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा दिया है। कोविड से ठीक हो चुके लोगों में प्रतिरक्षा प्रणाली की कमी से संबंधित दिक्कतें अधिक देखी जा रही हैं, लिहाजा वायरल संक्रमण, त्वचा की एलर्जी, कोलेसिस्टिटिस, एपेंडिसाइटिस जैसी दिक्कतों के मामले पहले की तुलना में काफी बढ़ गए हैं। वायरल संक्रमण के मामले अब 3-4 दिनों की अवधि से अधिक समय तक बने हुए देखे जा रहे हैं।

लगभग हर उम्र के व्यक्तियों में इस प्रकार के संक्रामक रोगों के मामले देखे जा रहे हैं।

covid recovered people facing low immunity and increased viral infections risk
धमनियों में ब्लॉकेज की स्थिति - फोटो : istock

हार्ट अटैक का जोखिम

कोरोना के बाद बढ़े हार्ट अटैक के जोखिमों को लेकर डॉ शिल्पा ने बताया हृदय रोगों की समस्याएं भी कोरोना महामारी के बाद से तेजी से बढ़ी हैं। इसके लिए डिहाइड्रेशन और ब्लड क्लॉटिंग बड़ा जोखिम हो सकती है। कई ऐसे मामले हैं जहां पर जिम में अचानक दिल का दौरा पड़ने से लोगों की मौत हो गई।

कोरोना संक्रमण का शिकार रहे अधिकतर लोगों में हार्ट की समस्याएं देखी जा रही हैं, एहतियातन सभी लोगों को डॉक्टर से मिलकर हृदय स्वास्थ्य की अच्छे से जांच जरूर करा लेना चाहिए। 

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कोरोना का स्वास्थ्य पर असर - फोटो : PTI

पोस्ट कोविड और इसके जोखिमों को लेकर अलर्ट

पोस्ट कोविड और लॉन्ग कोविड के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर अध्ययनों में लगातार अलर्ट किया जाता रहा है। तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग ने एक अध्ययन में बताया कि मार्च 2020 और मार्च 2022 के बीच कोविड-19 से ठीक होने वाले लगभग 6% रोगियों की जुलाई 2023 तक मृत्यु हो गई थी। 61-80 आयु वर्ग में लगभग 20% मौतें हुईं और 40 और उससे कम उम्र वालों में मृत्युदर एक प्रतिशत के करीब रही है।

इतना ही नहीं कोरोना संक्रमण का शिकार रहे लोगों में ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक कई प्रकार की दिक्कतें बनी हुई देखी जा रही हैं।

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कोविड-19 के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : iStock

कोमोरबिडिटी के शिकार लोगों में अधिक दिक्कतें

अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमित हुए लोगों में से 41 फीसदी को अस्पतालों में भर्ती होने की जरूरत पड़ी थी। इनमें से ज्यादा लोगों को कोमोरबिडिटी की शिकायत थी। इनमें से डायबिटीज (15.5%) और हाई ब्लड प्रेशर की (13.6%) रोगियों की संख्या सबसे ज्यादा देखी गई। 

अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया, कोरोना वायरस ने सेहत को कई प्रकार से प्रभावित किया है। इसके कारण होने वाली गंभीर जटिलताओं के मामले भी अधिक देखे जाते रहे हैं। महामारी ने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को जिस तरह से प्रभावित किया है उसके कारण भविष्य में जोखिमों के बने रहने की भी आशंका है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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