चीन में इन दिनों कोरोना संक्रमण के मामलों में देखे जा रहे उछाल ने दुनियाभर के लिए चिंता बढ़ा दी है। भारत में भी लोगों में संक्रमण का डर सताने लगा है, फिलहाल यहां स्थिति काफी नियंत्रित है। कोरोना के खतरे को देखते हुए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा की। वहीं संसद में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि देश में कोरोना की स्थिति काफी नियंत्रित है, बचाव के सभी इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से कोरोना से बचाव के उपायों का पालन करते रहने की अपील की है।
Covid-19: विशेषज्ञों ने दी राहत भरी जानकारी- भारत में कोरोना का खतरा अधिक नहीं, बस इन बातों का रखें ध्यान
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भारत में ज्यादा नहीं होगा BF.7 का असर
डॉ आशीष जैन कहते हैं, अध्ययनों से पता चलता है कि BF.7, ओमिक्रॉन का ही एक सब-वैरिएंट है, ऐसे में अगर इसका भारत में भी प्रसार बढ़ता है तो ज्यादा चिंता की आवश्यकता नहीं है। इसके दो कारण हैं,
पहला ओमिक्रॉन के तमाम वैरिएंट्स को पहले ज्यादा गंभीर रोककारक नहीं देखा गया है। यह संक्रामक तो हैं पर इसके कारण गंभीर रोगों का खतरा कम होता है।
और दूसरा- चूंकि पहले भी देश में ओमिक्रॉन की एक लहर आ चुकी है जिसमें ज्यादातर लोग संक्रमित हुए थे, ऐसे में अगली बार इसका लोगों पर असर कम ही होगा।
हालांकि अभी इन नए वैरिएंट्स की प्रकृति के बारे में अध्ययनों में बहुत स्पष्ट नहीं है ऐसे में जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
गंभीर लक्षणों की आशंका कम
महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक कहते हैं, फिलहाल हम इस वैरिएंट की विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, पर जिस तरह से रिपोर्ट्स में पता चलता है कि BF.7, ओमिक्रॉन का ही एक सब-वैरिएंट है तो ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इसके कारण ज्यादा गंभीर लक्षण नहीं होंगे, जैसा कि ओमिक्रॉन के पहले के वैरिएंट्स में भी देखा गया है।
इससे संक्रमण की स्थति में कमजोर प्रतिरक्षा वालों को छोड़ दें तो लोगों को आईसीयू या ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए।
बचाव करते रहना बहुत आवश्यक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भले ही देश में कोरोना के मामले काफी नियंत्रित हैं, फिर भी बचाव के लिए सभी लोगों को गंभीरता दिखाने की जरूरत है। कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का सख्ती से पालन करते रहें। मास्क लगाना, हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहना जरूरी है। अगर हम सख्ती से इन बातों का पालन कर लेते हैं तो न सिर्फ संक्रमण से बच सकते हैं साथ ही एक और लहर के खतरे को भी टाल सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।