कोरोनावायरस के कारण वैश्विक स्तर पर संक्रमण का खतरा लगातार चौथे साल भी जारी है। हालिया मामलों के लिए ओमिक्रॉन के म्यूटेटेड JN.1 सब-वैरिएंट को बढ़ते मामलों का प्रमुख कारण माना जा रहा है। एक महीने के भीतर इस वैरिएंट के कारण चीन, सिंगापुर, भारत सहित कई अन्य देशों में कोरोना के एक्टिव मामलों में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है।
Covid Explainer: JN.1 वैरिएंट के कारण संक्रमण में वृद्धि, हर बार नवंबर-दिसंबर में क्यों बढ़ने लगता है कोरोना?
एक बार फिर से बढ़ रहा है कोरोना का खतरा
साल 2023 में कोरोना की रफ्तार काफी नियंत्रित देखी गई। वैश्विक स्तर पर कम होते संक्रमण के मामलों को देखते हुए मई में डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को 'ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी' की सूची से बाहर कर दिया था। हालांकि साल खत्म होते-होते वायरस के एक नए प्रकार ने कई देशों में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए चिंता बढ़ा दी।
महामारी की शुरुआत से ही इस बात को लेकर सवाल उठते रहे हैं कि क्या ये वायरस गर्मी बढ़ते ही कम होने लगता है और सर्दियों में नया रूप लेकर संक्रमण बढ़ाने लगता है? अध्ययनों में इसको लेकर अलग-अलग विश्लेषण भी सामने आ चुके हैं।
पहले कोरोना के इस ट्रेंड को देखिए।
दिसंबर में संक्रमण के बढ़ते मामले
सबसे पहले साल 2019 के आखिर में चीन में सार्स-सीओवी-2 वायरस से संक्रमण के पहला मामला सामने आया। कोरोना बिल्कुल नया था, जिसके कारण फरवरी-मार्च तक वैश्विक स्तर पर संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़े। इसके बाद 2020 के दिसंबर तक वायरस में उत्परिवर्तन हुआ, जिसके बाद बीटा, गामा और डेल्टा वैरिएंट के कारण फिर से संक्रमण की रफ्तार में वृद्धि रिपोर्ट की गई। डेल्टा वैरिएंट को अब तक का सबसे संक्रामक और घातक माना जा रहा है, जिसके कारण दुनियाभर में मौत के मामले सबसे ज्यादा बढे़।
एक साल बाद, दिसंबर 2021 में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट देखा गया, जिसकी प्रकृति ज्यादा गंभीर रोगकारक नहीं थी, लिहाजा प्रतिबंधों में ढील दी जाने लगी। 2022 के दिसंबर में ओमिक्रॉन में भी म्यूटेशन हुआ और बीए.2 और बीए.5 जैसे सब-वैरिएंट का उदय देखा गया। साल 2023 के दिसंबर में भी यही क्रम जारी है, अब नया सब-वैरिएंट JN.1 सामने आया है।
कोरोना का सर्दियों से कनेक्शन
ऑस्ट्रेलिया स्थित विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में यह समझने के लिए शोध किया गया कि क्या सर्दियों का मौसम कोरोनावायरस के प्रसार के लिए सबसे अनुकूल होता है? अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि वायरस की प्रकृति कम धूप, कम तापमान वातावरण में अधिक समय तक जीवित रहने वाली है। इसलिए पर्यावरण में सक्रिय वायरस सर्दियों के महीनों के दौरान म्यूटेट होकर तेजी से बढ़ने लगते हैं।
इसी तरह साल 2020 में किए गए एक अन्य अध्ययन में कोरोनावायरस और कम आर्द्रता के बीच संबंधों को समझने की कोशिश की गई। इसमें शोधकर्ताओं ने नोट किया कि आर्द्रता में 1% की भी कमी के कारण कोविड-19 के मामलों में 6% तक की वृद्धि हो सकती है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में इंटेसिव केयर यूनिट में कोरोना रोगियों का इलाज करने वाले वरिष्ठ चिकित्सक डॉ आर.एन.सिंह बताते हैं, वायरस के प्रकृति सर्दियों में बढ़ने वाली है, साथ ही नवंबर-दिसंबर के महीनों में लोगों का ज्यादातर समय बंद घरों-ऑफिस में बीतता है। इसमें एक दूसरे से निकट संपर्क अधिक होता है, ऐसे में अगर एक को भी संक्रमण हो जाए तो इसके काफी तेजी से बढ़ने का जोखिम रहता है। सर्दियां शुरू होते ही कोरोना के मामलों में इजाफे का एक संभावित कारण ये भी हो सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
The influence of temperature, humidity, and simulated sunlight on the infectivity of SARS-CoV-2 in aerosols
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