फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Covid Explainer: JN.1 वैरिएंट के कारण संक्रमण में वृद्धि, हर बार नवंबर-दिसंबर में क्यों बढ़ने लगता है कोरोना?

Abhilash Srivastava अभिलाष श्रीवास्तव
Updated Mon, 25 Dec 2023 07:56 PM IST
विज्ञापन
covid-19 news in india causes of Higher transmissibility of corona in winters
Covid in India - फोटो : Amarujala

कोरोनावायरस के कारण वैश्विक स्तर पर संक्रमण का खतरा लगातार चौथे साल भी जारी है। हालिया मामलों के लिए ओमिक्रॉन के म्यूटेटेड JN.1 सब-वैरिएंट को बढ़ते मामलों का प्रमुख कारण माना जा रहा है। एक महीने के भीतर इस वैरिएंट के कारण चीन, सिंगापुर, भारत सहित कई अन्य देशों में कोरोना के एक्टिव मामलों में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है।



अध्ययनों में इस वैरिएंट की संक्रामकता दर अधिक बताई जा रही है, साथ ही ओमिक्रॉन के अन्य वैरिएंट्स की तरह यह भी शरीर में वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने में सफल हो रहा है। संक्रमण के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया है।

दिसंबर 2019 में चीन से शुरू हुआ कोरोना का संक्रमण चार साल बीत जाने के बाद अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। वैक्सीनेशन के कारण बनी हर्ड इम्युनिटी के चलते लोगों में गंभीर रोगों का खतरा जरूर कम है, पर वायरस में लगातार म्यूटेशन जारी है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि हर बार नवंबर-दिसंबर में कोरोना के मामले क्यों बढ़ने लगते हैं? आइए इसे समझते हैं।

covid-19 news in india causes of Higher transmissibility of corona in winters
कोरोना का बढ़ता संक्रमण - फोटो : istock

एक बार फिर से बढ़ रहा है कोरोना का खतरा

साल 2023 में कोरोना की रफ्तार काफी नियंत्रित देखी गई। वैश्विक स्तर पर कम होते संक्रमण के मामलों को देखते हुए मई में डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को 'ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी' की सूची से बाहर कर दिया था। हालांकि साल खत्म होते-होते वायरस के एक नए प्रकार ने कई देशों में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए चिंता बढ़ा दी।

महामारी की शुरुआत से ही इस बात को लेकर सवाल उठते रहे हैं कि क्या ये वायरस गर्मी बढ़ते ही कम होने लगता है और सर्दियों में नया रूप लेकर संक्रमण बढ़ाने लगता है? अध्ययनों में इसको लेकर अलग-अलग विश्लेषण भी सामने आ चुके हैं।

पहले कोरोना के इस ट्रेंड को देखिए।

covid-19 news in india causes of Higher transmissibility of corona in winters
सर्दियों में कोरोना का खतरा - फोटो : iStock

दिसंबर में संक्रमण के बढ़ते मामले

सबसे पहले साल 2019 के आखिर में चीन में सार्स-सीओवी-2 वायरस से संक्रमण के पहला मामला सामने आया। कोरोना बिल्कुल नया था, जिसके कारण फरवरी-मार्च तक वैश्विक स्तर पर संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़े। इसके बाद 2020 के दिसंबर तक वायरस में उत्परिवर्तन हुआ, जिसके बाद बीटा, गामा और डेल्टा वैरिएंट के कारण फिर से संक्रमण की रफ्तार में वृद्धि रिपोर्ट की गई। डेल्टा वैरिएंट को अब तक का सबसे संक्रामक और घातक माना जा रहा है, जिसके कारण दुनियाभर में मौत के मामले सबसे ज्यादा बढे़।

एक साल बाद, दिसंबर 2021 में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट देखा गया, जिसकी प्रकृति ज्यादा गंभीर रोगकारक नहीं थी, लिहाजा प्रतिबंधों में ढील दी जाने लगी। 2022 के दिसंबर में ओमिक्रॉन में भी म्यूटेशन हुआ और बीए.2 और बीए.5 जैसे सब-वैरिएंट का उदय देखा गया। साल 2023 के दिसंबर में भी यही क्रम जारी है, अब नया सब-वैरिएंट JN.1 सामने आया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
covid-19 news in india causes of Higher transmissibility of corona in winters
कोरोना के नए वैरिएंट्स - फोटो : iStock

कोरोना का सर्दियों से कनेक्शन

ऑस्ट्रेलिया स्थित विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में यह समझने के लिए शोध किया गया कि क्या सर्दियों का मौसम कोरोनावायरस के प्रसार के लिए सबसे अनुकूल होता है? अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि वायरस की प्रकृति कम धूप, कम तापमान वातावरण में अधिक समय तक जीवित रहने वाली है। इसलिए पर्यावरण में सक्रिय वायरस सर्दियों के महीनों के दौरान म्यूटेट होकर तेजी से बढ़ने लगते हैं।

इसी तरह साल 2020 में किए गए एक अन्य अध्ययन में कोरोनावायरस और कम आर्द्रता के बीच संबंधों को समझने की कोशिश की गई। इसमें शोधकर्ताओं ने नोट किया कि आर्द्रता में 1% की भी कमी के कारण कोविड-19 के मामलों में 6% तक की वृद्धि हो सकती है।

विज्ञापन
covid-19 news in india causes of Higher transmissibility of corona in winters
कोरोना और गंभीर रोगों का खतरा - फोटो : iStock

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में इंटेसिव केयर यूनिट में कोरोना रोगियों का इलाज करने वाले  वरिष्ठ चिकित्सक डॉ आर.एन.सिंह बताते हैं, वायरस के प्रकृति सर्दियों में बढ़ने वाली है, साथ ही नवंबर-दिसंबर के महीनों में लोगों का ज्यादातर समय बंद घरों-ऑफिस में बीतता है। इसमें एक दूसरे से निकट संपर्क अधिक होता है, ऐसे में अगर एक को भी संक्रमण हो जाए तो इसके काफी तेजी से बढ़ने का जोखिम रहता है। सर्दियां शुरू होते ही कोरोना के मामलों में इजाफे का एक संभावित कारण ये भी हो सकता है। 



--------------------
स्रोत और संदर्भ
The influence of temperature, humidity, and simulated sunlight on the infectivity of SARS-CoV-2 in aerosols

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed