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Covid-19: सीडीसी ने बताया इतने लोगों को कभी नहीं हुआ संक्रमण, ज्यादातर लोगों में दिखी सुरक्षात्मक एंटीबॉडीज

Sat, 08 Jul 2023 12:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 08 Jul 2023 12:32 PM IST
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covid 19 data worldwide, antibodies for coronavirus after vaccine and infection
कोविड-19 संक्रमण की स्थिति - फोटो : iStock

पिछले तीन साल से वैश्विक स्तर पर कोविड-19 गंभीर समस्या रही है। भले ही इन दिनों दुनियाभर में संक्रमण की रफ्तार काफी नियंत्रित है, पर विशेषज्ञ कहते हैं इसे अभी भी हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। हाल ही में वैज्ञानिकों ने अमेरिका के कुछ स्टेट्स में कोरोना के नए वैरिएंट EU.1.1 की पुष्टि की है, जिसको लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। छह जुलाई तक दुनियाभर में 69.12 करोड़ लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है जिसमें से 68.98 लाख लोगों की मौत हुई।



कोरोना के संक्रमण को लेकर सामने आए एक हालिया आंकड़े में विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि साल 2022 के अंत तक अमेरिका में लगभग 5 में से 1 व्यक्ति कभी भी COVID-19 से संक्रमित नहीं हुआ था। यह निष्कर्ष रक्तदान के विश्लेषण से आया है। सीडीसी ने 2022 के दौरान हर 3 महीने में 143,000 लोगों के डोनेटेड रक्त का विश्लेषण किया, जिसमें कोविड-19 एंटीबॉडी की उपस्थिति का पता लगाया गया। 

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कोविड-19 का जोखिम - फोटो : istock

कोविड-19 के आंकड़ों में आ रहा है सुधार

सीडीसी के आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई तक अमेरिका में कोविड-19 से 1.1 मिलियन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी थी। महामारी के पहले 3 वर्षों की तुलना में 2023 की पहली छमाही में होने वाली मौतों में कमी आई है, इस वर्ष 41,538 लोगों की कोविड से जान गई है।

इस वर्ष कोविड-19 से होने वाली लगभग 3 में से 2 मौतें अस्पताल या नर्सिंग होम में हुईं और मरने वाले 89% लोग 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे। जिसका मतलब है कि कोविड-19 के लिए किए गए रोकथाम के प्रयास बेहतर रहे हैं और समय के साथ कोरोनावायरस का प्रभाव कम हो रहा है। 

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वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा - फोटो : ANI

टीकाकरण की विशेष भूमिका

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि कोरोना के जोखिमों पर नियंत्रण पाने में टीकाकरण की विशेष भूमिका रही है। टीकाकरण से बनी एंटीबॉडीज की उपस्थिति को जानने के लिए डोनर ब्लड का विश्लेषण किया गया। इस आधार पर जब वैक्सीन और प्राकृतिक संक्रमण से शरीर में बनीं एंटीबॉडीज के डेटा को संयोजित किया गया, तो इसमें पता चला कि साल 2022 के अंत तक लगभग 97% लोगों में एंटीबॉडीज थीं।

रिपोर्ट में, सीडीसी लेखकों ने बताया कि शरीर में एंटीबॉडी की उपस्थिति संक्रमण से बचाव और गंभीर रोग के जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती है, लेकिन हर किसी व्यक्ति में एंटीबॉडी का स्तर भिन्न हो सकता है। लेखकों ने कहा कि अभी तक कोई मानक निर्धारित नहीं किया गया है जो आवश्यक एंटीबॉडी के न्यूनतम स्तर को दर्शाता हो।

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कोरोना के नए वैरिएंट्स का खतरा - फोटो : Istock

वैरिएंट्स में म्यूटेशन अब भी जारी, रहें सावधान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही शरीर में एंटीबॉडी का स्तर बेहतर है और कोरोना की वैश्विक रफ्तार काफी नियंत्रित है, फिर भी खतरा टला नहीं है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि वायरस अब भी म्यूटेट हो रहा है जिससे भविष्य में नए वैरिएंट्स के जोखिमों से इनकार नहीं किया जा सकता है।

इसी जोखिम को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना ने नए वैरिएंट्स को टारगेट करने वाले टीकों को मंजूरी देने के लिए आवेदन किया है। भारत ने भी हाल ही में ओमिक्रॉन वैरिएंट्स के लिए खास बूस्टर वैक्सीन लॉन्च की है।



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स्रोत और संदर्भ
2022 Nationwide COVID-19 Infection- and Vaccination-Induced Antibody Seroprevalence (Blood donations)

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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