दुनिया के ज्यादातर देशों में फिलहाल कोरोना की स्थिति काफी नियंत्रित है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ओमिक्रान के वैरिएंट्स में म्यूटेशन का खतरा और इसके कारण संक्रमण बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। वैज्ञानिकों की एक टीम पिछले कई महीनों से नए वैरिएंट्स को लक्षित करने वाले टीके तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। इससे संबंधित दो बड़े अपडेट हैं जिनको जानना सभी के लिए आवश्यक है।
Covid Vaccine: ओमिक्रॉन वैरिएंट्स से संक्रमण का कम हो खतरा, आपको भी जरूर जाननी चाहिए ये दो बड़ी खबरें
भारत ने लॉन्च की बूस्टर वैक्सीन
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को ओमिक्रॉन वैरिएंट के लिए खास एमआरएनए आधारित बूस्टर वैक्सीन लॉन्च की है। इस वैक्सीन की नाम GEMCOVAC-OM है और ये भारत की पहला mRNA वैक्सीन है, जिसे जेनोवा द्वारा स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया है।
यह एक थर्मोस्टेबल वैक्सीन है और इसे अन्य एमआरएनए-आधारित टीकों जैसे अल्ट्रा-कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं होगी। इसकी अनूठी विशेषता यह है कि इस टीके को इंजेक्शन के बिना दिया जा सकता है।
मॉडर्ना की मोनोवैलेंट वैक्सीन
वहीं दूसरी तरफ मॉडर्ना ने खास तौर पर ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट XBB.1.5 को टारगेट करने वाली मोनोवैलेंट वैक्सीन तैयार कर ली है, जिसकी मंजूरी के लिए एफडीए से सिफारिश की है। मोनोवैलेंट उन द्विसंयोजक बूस्टर शॉट्स से अलग है जो कोरोनोवायरस के मूल और ओमिक्रॉन दोनों वैरिएंट्स को लक्षित करता है। मॉडर्ना की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रारंभिक नैदानिक डेटा में XBB.1.5 वैरिएंट के खिलाफ मोनोवैलेंट वैक्सीन को काफी असरदार पाया गया है।
कोविड वैक्सीन निर्माता फाइजर और नोवावैक्स भी पहले से ही XBB.1.5 और अन्य वर्तमान में प्रसारित सब-वैरिएंट को लक्षित करने वाले टीकों को विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
कोरोना के नए वैरिएंट्स पर इतना जोर क्यों?
अब सवाल उठता है कि आखिर सभी कंपनियां कोरोना के नए वैरिएंट्स, विशेषतौर पर XBB.1.5 वैरिएंट को टारगेट करने वाली वैक्सीन क्यों बनाना चाह रही हैं?
असल में भारत सहित दुनिया के कई अन्य देशों में यही वैरिएंट हाल के महीनों में संक्रमण के मामलों में तेजी से उछाल का कारण बना था। अध्ययनों में पाया गया कि इससे वो लोग भी संक्रमित हो रहे थे जो पहले कोविड के टीके लगवा चुके थे। शोधकर्ताओं ने पाया यह वैरिएंट पहले के टीकों से बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा दे रहा था, ऐसे में ओमिक्रॉन के लिए खास तौर पर निर्मित वैक्सीन की मांग उठ रही थी।
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