चीन के वुहान से फैलना शुरु हुआ कोरोना वायरस अब दुनियाभर में फैल चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस के पहले मामले की पुष्टि 31 दिसंबर 2019 को हुई थी। जिस तेजी से वायरस फैला, उसे देखते हुए 30 जनवरी 2020 को इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया गया। लेकिन शुरुआती वक्त में इस वायरस के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी और इस कारण इसका इलाज भी जल्द नहीं मिल पाया।
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हैदराबाद में मास्क पहने युवतियां(File Photo)
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अब तक इस वायरस से बचने के लिए कोई टीका नहीं बन पाया है। इस वायरस के बारे में और इसके संक्रमण के तरीकों के बारे में जानकारी तो उपलब्ध है लेकिन अब तक इसका कोई इलाज नहीं मिला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई देशों में डॉक्टर इससे निपटने के लिए टीका तलाशने के काम में जुटे हैं लेकिन क्या इसका टीका जल्द बन पाएगा?
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भारत में कोरोनावायरस की दस्तक के बाद अपने बचाव के लिए मास्क पहने लोग।
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कब तक बनेगा कोरोना का टीका?
इस वायरस पर शोध करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने इसका टीका बना लिया है और जानवरों पर इसका टेस्ट शुरु कर दिया है। अगर सब कुछ सही रहा तो इसी साल इंसानों में भी इसका परीक्षण शुरु किया जा सकता है।
अगर वैज्ञानिक इस बात से ख़ुश भी हैं कि कोरोना वायरस के लिए टीका मिल गया है तब भी बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन शुरु होने में अभी वक्त लगेगा है। इसका मतलब ये हुआ कि असल में अभी भी ये नहीं कहा जा सकता कि अगले साल से पहले ये टीका बाजार में उपलब्ध हो जाएगा।
दशकों से वायरस से निपटने के लिए जो टीके बने उनमें असली वायरस का ही इस्तेमाल होता आया है। मीजल्स, मम्प्स और रूबेला (एमएमआर यानी खसरा, कंठमाला और रुबेला) टीका बनाने के लिए ऐसे कमजोर वायरस का इस्तेमाल होता है जो संक्रमण नहीं कर सकते। साथ ही फ्लू के टीके में भी इसके वायरस का ही इस्तेमाल होता है।