भारत में 16 जनवरी से कोविड 19 का टीकाकरण शुरू होने जा रहा है। शनिवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि प्राथमिकता के स्तर पर पहले तीन करोड़ स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर को वैक्सीन लगाई जाएगी। मंत्रालय ने कहा कि इसके बाद 50 से ऊपर उम्र वालों और 50 से कम उम्र वाले उन लोगों को जो कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हैं को वैक्सीन लगाई जाएगी। भारत में ऐसे लोगों की तादात 27 करोड़ है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह घोषणा प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में महामारी पर हुई समीक्षा बैठक के बाद की है। भारत में कोरोना वैक्सीन का दूसरा ड्राई रन शुक्रवार यानी आठ जनवरी से शुरू हो चुका है। इसके तहत देश के सभी जिलों में टीकाकरण का पूर्वाभ्यास कराए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
भारत में कितने की मिलेगी कोरोना वैक्सीन, कोविशील्ड और कोवैक्सिन असर कैसे करेंगे? जानिए सबकुछ
निर्धारित प्रोटोकॉल के मुताबिक, सबसे पहले इसे हेल्थकेयर कर्मियों यानी डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिक्स और स्वास्थ्य से जुड़े लोगों को दिया जाएगा। इनकी संख्या 80 लाख से एक करोड़ बताई जा रही है। अगला चरण होगा करीब दो करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स यानी राज्य पुलिसकर्मियों, पैरामिलिटरी फोर्सेस, फौज, सैनिटाइजेशन वर्कर्स को वैक्सीन मुहैया कराने का। इस दौरान करीब 27 करोड़ ऐसे लोगों का डाटा जुटाया जाता रहेगा, जिनकी उम्र 50 साल से ज्यादा है या कम मगर वे किसी न किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। 50 साल से नीचे की उम्र के वो लोग भी टीकाकरण अभियान में शामिल होंगे जिनमें कोरोना के लक्षण रहे हों।
सरकार की योजना है कि वैक्सीन पहले निर्माताओं से चार बड़े कोल्ड स्टोरेज केंद्रों (करनाल, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता) तक पहुंचाई जाएंगी, जहां से उन्हें 37 राज्य-संचालित स्टोर्स में भेजा जाएगा। इसके बाद वैक्सीन की खेपों को जिला स्तर के स्टोर तक भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि शहर से लेकर गांवों तक टीकाकरण की प्रक्रिया पूरा करने के मकसद से करीब साढ़े चार लाख कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन (कोवैक्सिन) को 12 साल से बड़ी उम्र के बच्चों के आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है। साथ ही भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ने इस वैक्सीन की 18 साल से कम उम्र के टीनेजर्स पर भी क्लीनिकल ट्रायल मोड की अनुमति मिल चुकी है। इसके तहत जिन भी बच्चों को ये वैक्सीन दी जाएगी उनके स्वास्थ्य लक्षणों की निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी।
भारत में कौन सी कोरोना वैक्सीन मिल सकेंगी? क्या दूसरी भी बन रहीं हैं?
भारत में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने कोविड-19 के इलाज के लिए दो वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दी है। ये दो वैक्सीन हैं- कोविशील्ड और कोवैक्सिन। कोविशील्ड जहां असल में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका का भारतीय संस्करण है, वहीं कोवैक्सिन पूरी तरह भारत की अपनी वैक्सीन है जिसे 'स्वदेशी वैक्सीन' भी कहा जा रहा है। कोविशील्ड को भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया कंपनी बना रही है। वहीं, कोवैक्सिन को भारत बायोटेक कंपनी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर बना रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले वर्ष दिसंबर में जानकारी दी थी कि तब देश में आठ कोरोना वैक्सीन बन रही हैं जो क्लीनिकल ट्रायल के अलग-अलग स्तर पर थीं।
कोविशील्ड और कोवैक्सीन के अलावा इनके नाम हैं:
- ZyCoV-D - कैडिला हेल्थकेयर की ये वैक्सीन डीएनए प्लेटफॉर्म पर बनाई जा रही है। इसके लिए कैडिला ने बायोटेकनोलॉजी विभाग के साथ सहयोग किया है। इसके तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं।
- स्पूतनिक-वी - ये रूस की गमलेया नेशनल सेंटर की बनाई वैक्सीन है जो ह्यूमन एडेनोवायरस प्लेटफॉर्म पर बनाई जा रही है। बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन हैदराबाद की डॉक्टर रैडीज लैब कर रही है। ये वैक्सीन तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल तक पहुंच चुकी है।
- अमेरिकी की एमआईटी की बनाई प्रोटीन एंटीजेन बेस्ड वैक्सीन का उत्पादन हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई लिमिटेड कर रही है। इसके पहले और दूसरे चरण के ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो चुके हैं।
- HGCO 19 - अमेरिका की एचडीटी की एमआरएनए आधारित इस वैक्सीन का उत्पादन पुणे की जिनोवा नाम की कंपनी कर रही है। इस वैक्सीन को लेकर जानवरों पर होने वाले प्रयोग खत्म हो चुके हैं और जल्द ही इसके पहले और दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल शुरू होने वाले हैं।
- अमेरिका की ऑरोवैक्सीन के साथ मिल कर भारत की ऑरोबिन्दो फार्मा एक वैक्सीन बनी रही है जो फिलहाल प्री-डेवेलपमेंट स्टेज पर है।
भारत में कोविड-19 से अब तक एक करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं जिसमें से करीब डेढ़ लाख की मौत भी हो चुकी है।