कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के कई देशों के वैज्ञानिक जल्द से जल्द इसकी वैक्सीन तैयार करने को जतन कर रहे हैं। भारत, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका समेत कई देश वैक्सीन बनाने की राह में अग्रसर हैं। भारत में दो वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू हो चुका है। रूस ने अगस्त में बड़े पैमाने पर अंतिम ट्रायल के लिए वैक्सीन लॉन्च करने की बात कही है। ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन अंतिम ट्रायल के फेज में है। वहीं, अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना, चाइनीज कंपनी सिनोवैक वगैरह भी वैक्सीन बनाने के काफी नजदीक है। तो आइए जानते हैं, भारत समेत तमाम देशों में वैक्सीन को लेकर ताजा अपडेट क्या है:
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Coronavirus vaccine Update: देसी वैक्सीन पर अच्छी खबर, अन्य देश भी सफलता के करीब, जानें पूरी अपडेट
Sun, 19 Jul 2020 02:39 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sun, 19 Jul 2020 02:39 AM IST
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Covaxin Update
- फोटो : Twitter@Dr. Harshwardhan
Covaxin Update
- फोटो : ICMR/Amar Ujala
देसी वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट नहीं
- आईसीएमआर की मदद से भारत बायोटेक द्वारा निर्मित देसी कोरोना वैक्सीन 'कोवाक्सिन' का ह्यूमन ट्रायल शुरू हो गया है और डोज देने के बाद इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हुआ है। बिहार में पटना एम्स के बाद हरियाणा के रोहतक पीजीआई में भी वॉलेंटियर्स को वैक्सीन की पहली डोज दी जा चुकी है। कुछ देर तक निगरानी में रखने के बाद सभी को घर भेज दिया गया।
- पटना एम्स के नोडल पदाधिकारी के मुताबिक, वैक्सीन का दूसरा डोज 14 दिनों के बाद दिया जाएगा। उसके बाद निगरानी में रख कर रिजल्ट देखा जाएगा। उम्मीद है कि सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
कोवाक्सिन वैक्सीन
- फोटो : ट्विटर
Covaxin कैसे बनाई गई है?
- आईसीएमआर और भारत बायोटेक की Covaxin एक 'इनएक्टिवेटेड' वैक्सीन है यानी यह उन कोरोना वायरस के पार्टिकल्स से बनी है, जिन्हें निष्क्रिय कर दिया गया था या मार दिया गया था ताकि वे संक्रमित न कर पाएं। वायरस ही वायरस की काट होती है, इसी पर आधारित यह वैक्सीन है। इसकी डोज से शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बनती हैं और हमारा शरीर वायरस से मुकाबला करने के काबिल हो जाता है।
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कोरोना वैक्सीन
- फोटो : social media
भारत की दूसरी वैक्सीन भी रेस में
- भारतीय दवा महानियंत्रक से अनुमति के बाद भारत की एक और वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू हो चुका है। इसे अहमदाबाद की कंपनी जायडस कैडिला बना रही है। ZyCov 'प्लाज्मिड डीएनए' वैक्सीन है, जो दरअसल एक तरह का डीएनए अणु होती हैं। इनमें एंटीजेन कोड किया जाता है। इसका डीएनए सीक्वेंस वायरस से मैच करेगा तो शरीर में उसके खिलाफ एंटीबॉडीज बनने लगेगी। इस तरह कोरोना वायरस के खिलाफ हमारा शरीर इम्यून हो जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
भारत में और भी तरीकों पर चल रहा काम
- भारत में कोरोना वैक्सीन तैयार करने के लिए कई तरीकों पर काम हो रहा है। वैक्सीन से जुड़े शोधों के लिए डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी और उसके 16 रिसर्च संस्थान लगे हुए हैं। फरीदाबाद स्थित संस्थान में एंटीवायरल्स, थिरपॉटिक्स और वैक्सीन के लिए हैम्सटर संक्रमण मॉडल बनाया गया है। देश में एनिमल मॉडल्स, वायरल स्पाइक प्रोटीन, रिसेप्टर बाइंडिंग पेप्टाइल्स, स्यूडोवायरस, एंटीबॉडीज वगैरह पर भी शोध हो रहे हैं।