डॉ. परवेश मलिक
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
देश में कोरोना की दूसरी लहर से हर दिन संक्रमित मरीजों की एक बड़ी संख्या सामने आ रही है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि कोरोना को मात देकर अपने घर लौटने वाले लोगों की संख्या भी काफी है। हालांकि, इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं कि हम लापरवाही बरतनें लगें। बल्कि ये वो समय है जब हमें और भी ज्यादा सतर्कता के साथ इस वायरस से लड़ना है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोरोना से संक्रमित होने के कितने दिन बाद खतरा बढ़ जाता है? शायद नहीं, तो चलिए जानते हैं।
2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
जब कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित होता है तो उसे ठीक होने में 14 दिन का समय लगता है और इसी में 5वें दिन से लेकर 10वें दिन का समय बेहद ही जरूरी और महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पांचवें दिन से दिखने वाले लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए। वहीं, संक्रमित व्यक्ति के 14 दिन के पीरियड के बीच वाले समय में अगर कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो उसे खास ध्यान देने की जरूरत है।
3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
कोरोना से संक्रमित होने के शुरुआती दिनों में दिखने वाले लक्षण आपको उलझन में डाल सकते हैं, क्योंकि शुरुआती समय जहां कुछ लोगों में लक्षण नहीं दिखते हैं तो वहीं कुछ लोगों में हल्के लक्षण दिखते हैं। ऐसे में पांचवें से दसवें दिन के बीच दिखने वाले लक्षणों के आधार पर इसे समझा जा सकता है।
4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
पांच-दस दिन का आइसोलेशन पीरियड उन जटिलताओं को सामने ला सकता है, जो कोरोना वायरस से से संक्रमित होने के बाद आपको झेलना पड़ सकता है। साथ ही इस समय पर इंफेक्शन की गंभीरता को भी समझा जा सकता है। कोरोना से संक्रमित हुए व्यक्ति के लिए 6वें दिन के बाद से असली जंग शुरू होती है, क्योंकि यही वो समय होता है जब हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं। साथ ही इसी समय पर पता चलता है कि मरीज की हालात सुधर रही है या फिर उसे आगे के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना होगा।
5 of 5
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
इन्हीं दिनों में कोरोना संक्रमित व्यक्ति में कई गंभीर लक्षण भी दिखते हैं। इसमें ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल का कम होना, बुखार तेज होना, बेचैनी होना, बेहोश होना, सांस लेने में तकलीफ होना और कई मरीजों के रेस्पिरेटरी सिस्टम में भी समस्याएं बढ़ सकती है। इसलिए इस समय को काफी अहम माना जाता है।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।