भारत में कोरोना वायरस की पहली लहर के बाद अब दूसरी लहर से काफी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं। हाालत ये हैं कि कई राज्यों ने पूर्ण लॉकडाउन या लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगा रखी है, ताकि इस वायरस की चेन को तोड़ा जा सके। इन सबके बीच देश में N440K की काफी चर्चा है, जो कि कोरोना वायरस का एक वैरिएंट है। लेकिन अभी आप इस बात से अंजान होंगे कि ये कितना खतरनाक है? तो चलिए जानते हैं इस वैरिएंट के बारे में।
कितना खतरनाक है कोरोना वायरस का N440K वैरिएंट? यहां जानें सबकुछ
दरअसल, पिछले दिनों कहा गया कि कोरोना के N440K वैरिएंट से आंध्र प्रदेश में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। वहीं, इसके बाद आंध्र प्रदेश के कोविड कमांड सेंटर के प्रमुख डॉक्टर के. एस. जवाहर रेड्डी ने कहा है कि कोरोना का ये वैरिएंट दिसंबर 2020, जनवरी और फरवरी 2021 में प्रचलन में था।
उन्होंने ये भी कहा कि इस वैरिएंट के कारण मार्च में भारी गिरवाट आई। वहीं, मौजूदा पॉजिटिविटी दर में N440K वैरिएंट की हिस्सेदारी न्यूनतम है। यहां आपको बता दें कि सेंटर फॉर सेल्यूलर एंट मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के वैज्ञानिकों ने N440K वैरिएंट की खोज आंध्र प्रदेश में की थी। उस वक्त इस वैरिएंट को 15 गुना अधिक संक्रामक बताया गया था। वैज्ञानिकों का कहना था कि इस वैरिएंट के कारण ही लोग तीन से चार दिन में बीमार हो रहे हैं।
जहां कोरोना वायरस के इस N440K वैरिएंट को लेकर कहा जा रहा था कि ये एक हजार गुना तेजी से फैलता है। वहीं, अब इस बात से किनारा कर लिया गया है। कुल मिलाकर मौजूदा समय में इस वैरिएंट को खतरनाक नहीं माना जा रहा है।
वहीं, सवाल ये भी आता है कि जब-जब ये वायरस खुद को बदलता है तो कई तरह की दिक्कतें सामने आती है। ऐसे में अगर ये वायरस खुद का रूप बदल न पाए, क्या ऐसा हो सकता है? इस पर विशेषज्ञ मानते हैं कि अब तक कोई दवा या वैक्सीन ऐसी नहीं है जो इस वायरस को म्यूटेट होने से रोक सकती है।
स्रोत और संदर्भ:
https://twitter.com/ANI/status/1390219224245669897
अस्वीकरण नोट: यह लेख आंध्र प्रदेश के कोविड कमांड सेंटर के प्रमुख डॉक्टर के. एस. जवाहर रेड्डी द्वारा कही गई बातों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।