ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने इस बात की पहचान कर ली है कि मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना वायरस का मुकाबला कैसे करती है। यह शोध नेचर मेडिसीन जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
Coronavirus से जंग में एक और कामयाबी, वैज्ञानिकों ने पता लगाया- कोरोना से कैसे लड़ता है मानव शरीर
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चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस का संक्रमण 159 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वायरस से संक्रमित 1।84 लाख से ज्यादा मामलों की पुष्टि की जा चुकी है जबकि इस कारण 7,500 से भी ज्यादा मौतें भी दर्ज की गई हैं।
इस शोध में शामिल प्रोफेसर कैथरीन केडज़िएर्स्का के मुताबिक, यह एक बेहद महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि हमें पहली बार शोध से यह पता चल पा रहा है कि हमारा शरीर (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कोरोना वायरस से कैसे लड़ता है।
मेलबर्न के पीटर डोहर्टी इंस्टीट्यूट फॉर इंफेक्शन एंड इम्यूनिटी के शोधकर्ताओं के इस काम की दूसरे कई शोधकर्ताओं ने भी तारीफ की है। एक शोधकर्ता ने इसे एक बड़ी सफलता बताया है।
एक ओर जहां कोरोनावायरस के संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं वहीं बहुत से लोगों ने इसके संक्रमण से मुक्ति भी पाई है। शोधकर्ताओं का कहना है संक्रमण हुए कई लोगों को क्वारेंटीन किया गया था लेकिन अब वो स्वस्थ होकर अपने घर लौटे हैं।
ये अपने आप में बताता है कि मानव शरीर को रोग रक्षा प्रणाली को इससे लड़ना आता है। वो मानते हैं कि अभी तक इस पर विशेष तौर पर ध्यान नहीं दिया गया था।
अपने शोध के बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पहला मौक़ा है जब रिसर्च के माध्यम से चार प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं की पहचान की गई है, जो कोविड 19 से लड़ने में सक्षम पाई गईं। इन कोशिकाओं का पता एक संक्रमित महिला की जांच से किया गया।
उन्हें मामूली-मध्यम संक्रमण था और उसे इसके अलावा दूसरी कोई भी बीमारी नहीं थी। चीन के वुहान शहर की एक महिला को संक्रमण के बाद ऑस्ट्रेलिया के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती कराये जाने के 14 दिनों के भीतर वो पूरी तरह स्वस्थ हो गईं।
प्रोफेसर केडजिएर्स्का ने बीबीसी को बताया कि उनकी टीम ने इस महिला की विस्तृत जांच की। उनकी जांच के केंद्र में इस महिला का इम्यून सिस्टम था। टीम ने अपनी जांच में यह पता लगाने की कोशिश की कि इस महिला का इम्यून सिस्टम कोरोना वायरस के संक्रमण पर किस तरह की प्रतिक्रिया करता है। वो बताती हैं
जब महिला की स्थिति में सुधार आने लगा तो उसके खून के बहाव में कुछ विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं को देखा गया। ये कुछ उसी तरह की वही कोशिकाएं थीं जो इंफ्लूएंजा के मरीजों में ठीक होने से पहले दिखाई देती हैं।