कोराना वायरस संक्रमण के मामले हर गुजरते दिन के साथ बढ़ते ही जा रहे हैं। इसको लेकर हर दिन नई रिसर्च भी सामने आ रही है। हाल में हुई एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कोरोना वायरस गले या फेफड़ों की तुलना में नाक की कोशिकाओं को आसानी से शिकार बना लेता है। नाक में घुसकर कोरोना वायरस बहुत ही तेजी से अपनी संख्या बढ़ाता है। नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस रिसर्च स्टडी के बाद इसके उपाय भी बताए हैं। शोधकर्ताओं ने सलाह दी है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए फेस मास्क या कपड़े से सिर्फ मुंह को ही नहीं, बल्कि नाक को भी अच्छे से ढंकना बेहद जरूरी है।
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नाक में घुसकर महज चार दिन में अपनी संख्या एक करोड़ तक बढ़ा लेता है कोरोना: रिसर्च
Sat, 20 Jun 2020 12:07 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sat, 20 Jun 2020 12:07 AM IST
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Coronavirus infection
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
Coronavirus Test
- फोटो : PTI
फेफड़ों से ज्यादा संवेदनशील है नाक
- शोधकर्ताओं के मुताबिक नए कोरोना वायरस के लिए गले या फेफड़ों की तुलना में नाक में मौजूद कोशिकाओं को निशाना बनाना ज्यादा आसान होता है। इनमें टिक कर कोरोना वायरस महज चार दिन में खुद की एक करोड़ से ज्यादा प्रतियां बना लेता है।
Coronavirus Test
- फोटो : Social Media
- नाक में संख्या बढ़ाने के साथ ही कोरोना वायरस धीरे-धीरे यह श्वासनली के रास्ते गले और फेफड़ों में भी फैलने लगता है। शोधकर्ताओं की सलाह है कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए नाक को मास्क से अच्छे से ढंकना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही कपड़े के मास्क को समय-समय पर साफ करते रहना बेहद जरूरी है।
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नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
- डॉ. रिचर्ड बाउचर के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने कोरोना से संक्रमित मरीजों की नासिकाओं, श्वासनली और फेफड़ों से लिए गए नमूनों का विश्लेषण किया। इसके साथ ही उन्होंने स्वस्थ लोगों के इन्हीं अंगों में मौजूद ऊतकों को लैब में कोरोना के संपर्क में रखकर उन पर पड़ने वाले असर का भी अध्ययन किया।
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जांच के लिए नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
- इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि नसिका में मौजूद ‘नेसल एपिथीलियम' नाम की कोशिकाएं कोरोना वायरस का सबसे पहला शिकार बनती हैं। उनमें फेफड़ों की तुलना में एक हजार गुना ज्यादा वायरस ठिकाना बना सकते हैं।