कोरोना वायरस को दुनिया में आए एक साल का समय होने वाला है और इतने ही समय में इस वायरस ने पूरे विश्व को संक्रमित कर दिया है। दुनियाभर में अब तक इस वायरस से सात करोड़ 27 लाख से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 16 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि यह अभी तक स्पष्ट तो नहीं हो पाया है कि कोरोना वायरस कैसे फैला, लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके प्रकोप का कारण चमगादड़ हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ वैज्ञानिक चमगादड़ों से सुराग तलाशने में जुटे हैं, ताकि अगली 'महामारी' की रोकथाम पहले ही कर ली जाए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
दरअसल, ब्राजील सरकार के फियोक्रूज संस्थान ने चमगादड़ समेत अन्य जंगली जानवरों में मौजूद वायरसों को एकत्र करने और उन पर अनुसंधान करने के मकसद से नवंबर में रात की एक परियोजना की शुरुआत की है। इस अनुसंधान के तहत ब्राजील के चार वैज्ञानिक रात के अंधेरे में रियो डी जेनेरियो के 'पेड्रा ब्रांका स्टेट पार्क' के घने वर्षावन में चमगादड़ों को पकड़ने निकलते हैं, ताकि उनपर शोध किया जा सके।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस शोध का मकसद उन वायरसों की पहचान करना है जो भविष्य में इंसानों में व्यापक स्तर पर जानलेवा संक्रमण फैलाने का कारण बन सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी मदद से दुनिया को अगली किसी महामारी की चपेट में आने से पहले ही उसकी रोकथाम की जा सकेगी।
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चूंकि सार्स, मर्स, इबोला, निपाह और हेंड्रस जैसे घातक वायरस के प्रसार के लिए चमगादड़ों को ही जिम्मेदार माना जाता है, इसलिए अधिकतर वैज्ञानिक खासतौर पर चमगादड़ों पर ही शोध करने को लेकर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और अगली किसी भी महामारी की रोकथाम के लिए वायरसों का गहराई से अध्ययन करने में जुटे हुए हैं।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोंटाना स्टेट विश्वविद्यालय में चमगादड़ों पर शोध करने वाली महामारी विशेषज्ञ रैना प्लोराइट का कहना है कि चमगादड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद मजबूत होती है, जो उन्हें वायरसों से सुरक्षा प्रदान करती है। उनका मानना है कि चमगादड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता के बारे में पता लगाकर वैज्ञानिक भविष्य की चिकित्सा रणनीति पर काम कर सकते हैं।