कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के अलग-अलग देशों में इस वायरस के विभिन्न पहलुओं को लेकर शोध हो रहे हैं। वैज्ञानिक इसकी दवा और वैक्सीन को बनाने में लगे हैं, तो दूसरी ओर शोधकर्ता इसके लक्षणों को लेकर भी रिसर्च कर रहे हैं। हाल में हुए एक रिसर्च में बताया गया है कि इलाज के बाद कोरोना के लक्षण गायब हो जाने के बाद भी मरीज के शरीर में कोरोना वायरस की उपस्थिति हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसलिए इस महामारी को रोकना चुनौती भरा है। आइए जानते हैं इस रिसर्च के बारे में:
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल में प्रकाशित इस रिसर्च में शोधकर्ताओं ने दावा कि है कि जिन मरीजों को रिसर्च सैंपल के तौर पर लिया गया, उनमें से आधे मरीजों में बीमारी के लक्षण गायब होने के बाद भी वायरस पाया गया। शोधकर्ताओं ने कोविड-19 के हल्के संक्रमण वाले 16 मरीजों का अवलोकन किया और इस नतीजे पर पहुंचे।
इस रिसर्च स्टडी में जिन 16 मरीजों की केस स्टडी की गई, उनका चीन की राजधानी बीजिंग स्थित पीएलए जनरल अस्पताल में बीते 28 जनवरी से नौ फरवरी तक इलाज हुआ। इस अवधि में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। लेकिन इसके बाद भी वायरस उसके शरीर में रहा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं में भारतीय मूल के वैज्ञानिक लोकेश शर्मा भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि इस स्टडी में जिन रोगियों के नमूनों का विश्लेषण किया, उनके रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें ठीक समझा गया और अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उन्होंने कहा कि आधे यानी 16 में से आठ मरीजों में वायरस का प्रसार हो ही रहा था।
मालूम हो कि कोरोना वायरस के शुरुआती लक्षण सर्दी, खांसी, बुखार और वायरल फ्लू से मिलते हैं। इसको लेकर बहुत सारे लोगों को सामान्य सर्दी, खांसी, बुखार या फ्लू में भी कोरोना संक्रमण होने का डर हो जाता है। हालांकि इसमें घबराने की बात नहीं है। कोरोना के शुरुआती लक्षणों में वायरल फ्लू से जो अंतर दिखता है, वह है खांसी। कोरोना संक्रमण की स्थिति में व्यक्ति को सूखी खांसी होती है। हालांकि केवल सूखी खांसी होना भी कोरोना का लक्षण नहीं कहा जा सकता। कोरोना के अन्य लक्षणों के बारे में जांच कर वे डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।