अमेरिका ने हाल ही में मॉडर्ना द्वारा विकसित कोविड-19 टीके के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी थी। वहां टीकाकरण अभियान के तहत लोगों को इस वैक्सीन की खुराक दी भी जा रही है। हालांकि अब इसके प्रायोगिक परीक्षण के नतीजे सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉडर्ना की वैक्सीन के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के विश्लेषण के नतीजों से यह पता चलता है कि यह कोरोना के संक्रमण को रोकने और गंभीर बीमारी की स्थिति में 94.1 फीसदी असरदार है। इस संबंध में एक अध्ययन बुधवार को शोध पत्रिका 'द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन' में प्रकाशित भी हुआ है।
2 of 4
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
अध्ययन के मुताबिक, प्रायोगिक परीक्षण के तहत 30,000 से अधिक प्रतिभागियों को औचक तरीके से टीका या प्लेसिबो दिया गया। इसमें वैक्सीन लेने वाले समूह में 11 लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण दिखे जबकि प्लेसिबो लेने वाले समूह के 185 प्रतिभागियों में कोरोना के लक्षण देखने को मिले। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि यह टीका कोरोना वायरस के खिलाफ 94.1 फीसदी प्रभावी है। साथ ही वह यह भी कहते हैं कि गंभीर बीमारी की स्थिति उन्हीं प्रतिभागियों में देखने को मिली, जिन्हें प्लेसिबो दिया गया था।
3 of 4
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
यह प्रायोगिक परीक्षण अमेरिका में ब्रिघम एंड विमेंस अस्पताल में किया गया। 'द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन' में छपे अध्ययन की सह-लेखक और संक्रामक रोग विशेषज्ञ लिंडसे बैडेन कहती हैं, 'ट्रायल के विश्लेषण के नतीजों से यह पता चलता है कि मॉडर्ना की वैक्सीन गंभीर बीमारी की स्थिति में भी असरदार है। इससे यह संकेत मिलता है कि वैक्सीन लेने के बाद कुछ समय के लिए संक्रमण और मौतों की संख्या को रोका जा सकता है।'
4 of 4
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अध्ययन के लिए अमेरिका के 99 जगहों से 30,420 वयस्कों को शामिल किया गया था, जिसमें ब्रिघम से 600 प्रतिभागी भी शामिल हुए थे। इसमें हर नस्ल और उम्र के लोग शामिल थे। लिंडसे बैडेन कहती हैं, 'हमारा काम जारी है। अगले महीने तक इस संबंध में हमारे पास और डाटा मौजूद होगा, जिससे हम वैक्सीन के असर के बारे में बेहतर ढंग से बता पाएंगे।'