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शोध में दावा: वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी कोरोना के कुछ वैरिएंट पर हो सकती है कम प्रभावी
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Tue, 16 Mar 2021 12:56 PM IST
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दुनियाभर में एक बार फिर काफी तेजी से कोरोना का संक्रमण बढ़ने लगा है। हालांकि इसके खिलाफ टीकाकरण भी काफी तेजी से चल रहा है। इस बीच एक नए शोध में यह दावा किया गया है कि कोरोना के कुछ नए वैरिएंट, जो ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में पाए गए हैं, उनपर मौजूदा वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी कम प्रभावी हो सकती है। सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, शोध में पाया गया है कि फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन लेने के बाद कोरोना के खिलाफ जो एंटीबॉडी बनी, वह ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन पर कम प्रभावी थे।
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अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह तुलना की कि वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी ने कोरोना के मूल वैरिएंट और नए वैरिएंट के खिलाफ कितनी अच्छी तरह से काम किया। अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर अलजेंड्रो बलाज ने कहा, जब हमने नए वैरिएंट्स के खिलाफ एंटीबॉडी की जांच की तो पाया कि तीन नए स्ट्रेन पर यह एंटीबॉडी बेअसर थी।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, चीन के वुहान के मूल कोरोना वायरस की तुलना में ब्राजील और जापान में मिले वायरस के स्ट्रेन तो पांच से सात गुना अधिक प्रतिरोधी थे। हालांकि वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि कोरोना के नए स्ट्रेन पर एंटीबॉडी कम प्रभावी है, इसका मतलब ये नहीं है कि वैक्सीन प्रभावी नहीं हैं।
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अलजेंड्रो बलाज कहते हैं, 'एंटीबॉडी के अलावा शरीर में प्रतिरक्षा की सुरक्षा के अन्य तरीके भी हैं। हमारे निष्कर्षों का यह मतलब नहीं है कि टीके कोरोना को नहीं रोकेंगे, बल्कि बात यह है कि एंटीबॉडी के कुछ हिस्सों को वायरस के नए वैरिएंट को पहचानने में परेशानी हो सकती है।'
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हाल ही में हुए तीन नए-नए अध्ययनों में यह दावा किया गया था कि अमेरिकी कंपनी फाइजर, चीनी कंपनी सिनोवैक और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन ब्राजील में पाए गए कोरोना के नए स्ट्रेन पर भी असरदार हैं।न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ब्राजील के फियोक्रूज बायोमेडिकल इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ अधिकारी मौरिसियो जुमा ने कहा था, 'प्रारंभिक अध्ययनों से पता चलता है कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोरोना के P.1 स्ट्रेन के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान करेगी।' हालांकि खून के थक्के जमने की रिपोर्ट मिलने के बाद फिलहाल इस वैक्सीन के इस्तेमाल पर कई देशों ने रोक लगा दी है।
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