दुनिया के लगभग सभी देशों में कोरोना का संक्रमण फैल चुका है। इसकी चपेट में आए लोगों की संख्या छह करोड़ से ज्यादा हो चुकी है जबकि अब तक इस महामारी से 14 लाख 14 हजार से भी अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। पहले ऐसा माना जा रहा था कि कोरोना से ठीक होने के बाद व्यक्ति दोबारा संक्रमित नहीं हो सकता, लेकिन बाद में ऐसे कई मामले सामने आए, जिसमें लोग कोरोना से एक बार फिर संक्रमित हो गए। सबसे हैरानी की बात तो ये है कि जो लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं, उनमें से भी कईयों में ठीक होने के बाद भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस फेफड़ों पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
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विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना वायरस इंसान के मुंह, नाक और आंखों के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और उसके बाद वह फेफड़ों तक पहुंच जाता है और भारी नुकसान पहुंचाता है। अक्तूबर में इससे संबंधित एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि कोरोना वायरस के कारण फेफड़ों में सफेद दाग पड़ जाते हैं और ऑक्सीजन का प्रवाह भी बाधित हो जाता है। ऐसे में लोगों को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ जाती है।
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कुछ महीने पहले ही चीन के वुहान से एक और रिपोर्ट आई थी, जिसमें बताया गया था कि वहां कोरोना से संक्रमित होकर ठीक होने वाले ज्यादातर मरीजों के फेफड़ों में दिक्कत थी। उनमें से लगभग 90 फीसदी मरीजों के फेफड़े लगभग खराब हो चुके थे। उनके फेफड़ों का वेंटिलेशन और गैस एक्सचेंज फंक्शन काम नहीं कर रहा था।
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अब तक हुए रिसर्च में यह पता नहीं चल पाया है कि क्षतिग्रस्त फेफड़ों की हालत कब तक ठीक हो पाती है, लेकिन कई अध्ययनों में यह जरूर कहा गया है कि कोरोना से ठीक हुए लोगों के फेफड़ों को स्थायी क्षति भी पहुंच सकती है या हो सकता है कि क्षतिग्रस्त फेफड़ों को ठीक होने में एक साल तक का भी समय लगे।
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कोरोना वायरस फेफड़ों को कैसे क्षतिग्रस्त करता है, इसको लेकर बीबीसी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जब कोरोना वायरस इंसान के फेफड़ों तक पहुंचता है तो वह फेफड़ों को छोटे-छोटे एयरसैक यानी वायुकोष बना देता है। इन्हीं वायुकोष में जब पानी जमने लगता है तो सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। ऐसा होने पर कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ जाता है।