Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
कोरोना वायरस का संक्रमण सीधे फेफड़ों पर असर करता है, ये तो कई अध्ययनों में साबित हो चुका है। यह संक्रमितों के फेफड़ों को तेजी से कमजोर कर रहा है, जिसकी वजह से मरीजों को निमोनिया और फेफड़ों में होने वाले गंभीर संक्रमणों का भी सामना करना प़ड़ रहा है। हालांकि बहुत सारे मरीज ऐसे भी हैं, जिनके फेफड़ों में गंभीर संक्रमण नहीं होता और वो ठीक हो जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों को अपने फेफड़ों का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है, क्योंकि बाद में भी परेशानियां हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि कोरोना से ठीक हो चुके लोग सैसे अपने फेफड़ों का ख्याल रखें?
सावधान: कोरोना से ठीक होने के बाद फेफड़ों का रखें खास ख्याल, छह महीने बाद भी हो सकती है यह समस्या
विशेषज्ञ कहते हैं कि कम गंभीर लक्षण वाले कोरोना मरीजों को कम से कम छह महीने तक 'ब्रीद होल्डिंग एक्सरसाइज' करनी चाहिए। इसके लिए पहले मुंह में सांस भर लें और फिर रोकें। अगर आप 25-30 सेकेंड तक सांस रोकने में सफल रहते हैं, तो इसका मतलब है कि आपके फेफड़े स्वस्थ हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फेफड़े बैलून की तरह होते हैं और आमतौर पर जब लोग सांस लेते हैं तो फेफड़ों के बाहरी हिस्से तक सांस नहीं पहुंचती, ऐसे में 'ब्रीद होल्डिंग एक्सरसाइज' करने से सलाह दी जाती है। इससे फेफड़ों के उन हिस्सों में भी ऑक्सीजन पहुंचती है और फेफड़ों में सिकुड़न नहीं होती।
दरअसल, विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों में छह महीने बाद भी 'लंग फाइब्रोसिस' की समस्या हो सकती है। 'लंग फाइब्रोसिस' का मतलब होता है फेफड़ों में सिकुड़न। इसलिए 'ब्रीद होल्डिंग एक्सरसाइज' बहुत ही जरूरी है।
कोरोना से ठीक होने के बाद मरीजों को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। अपने खाने में मिर्च और मसालों का सेवन कम करना चाहिए, यह फेफड़ों के लिए अच्छा होता है। इसके अलावा रोजाना योग करने और भाप लेने से भी फेफड़ों को सेहतमंद रखा जा सकता है।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।