कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में लोगों को बुरी तरह प्रभावित किया है। पहले भी इंसान के सामने वायरस का खतरा था। पहले भी महामारियां फैली थीं, लेकिन दुनिया को हर नए संक्रमण या फ्लू से निपटने के लिए इस तरह रुकना नहीं पड़ा था। तो इस कोरोना वायरस में ऐसा क्या है? इसकी बायोलॉजी में ऐसी क्या बात है जो हमारे शरीर और जीवन के लिए खतरनाक बन जाती है।
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हमारे शरीर की कोशिकाएं इंटरफर्नो नाम के केमिकल्स रिलीज करती हैं। जब इन केमिकल्स पर कोई वायरस कब्जा करता है, तब हमारे शरीर और प्रतिरक्षा तंत्र को वायरस की मौजूदगी की चेतावनी मिलने लगती है। लेकिन, कोरोना वायरस में इस चेतावनी को रोकने की 'गजब की क्षमता' होती है। प्रोफेसर लेहनर कहते हैं, 'ये काम वायरस इतनी अच्छी तरह करता है कि आपको पता ही नहीं चलता कि आप बीमार हैं।' वह बताते हैं कि जब आप संक्रमित कोशिकाओं को लैब में देखते हैं तो वो बिल्कुल भी संक्रमित नहीं लगतीं, लेकिन जब आप टेस्ट करते हैं तो पता चलता है कि इनमें बहुत सारा वायरस मौजूद है।
हिट एंड रन जैसा वायरस
जब हमारे शरीर में मौजूद वायरस 'लोड पीक' पर पहुंच जाता है तब हम बीमार पड़ते हैं और लक्षण दिखने लगते हैं। ऐसे में लक्षण ना दिखने के बावजूद भी वायरस शरीर में मौजूद होता है और एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। मरीज के अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति तक पहुंचाने में वायरल लोड को करीब एक हफ्ते का समय लगता है।
प्रोफेसर लेहनर कहते हैं, 'यह खुद के विकास का एक शानदार तरीका है। यह मरीज को तुरंत अस्पताल नहीं पहुंचाता बल्कि ठीक महसूस कराता है, आराम से बाहर घूमने देता है ताकि वायरस और फैल सके।' इसलिए कोरोना वायरस उस ड्राइवर की तरह है जो दुर्घटना करके तुरंत भाग जाता है। वायरस भी किसी संक्रमित व्यक्ति के ठीक होने या मरने से पहले तुरंत ही दूसरे व्यक्ति में भी चला जाता है।
साल 2002 के मूल सार्स-कोरोना वायरस और मौजूदा कोरोना वायरस में ये बहुत बड़ा अंतर है। मूल सार्स-कोरोना वायरस में लोगों के बीमार होने यानी लक्षण दिखने के बाद संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता था, जिससे उन्हें आईसोलेट करना आसान हो जाता था।
शरीर के लिए अजनबी वायरस
पिछली महामारी को याद करें? साल 2009 में एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों में बहुत डर था। हालांकि, यह उतना जानलेवा नहीं निकला जितनी चिंता जताई जा रही थी। इसकी वजह थी कि बुजुर्गों में इस वायरस से लड़ने की क्षमता कुछ हद तक पहले से ही मौजूद थी, क्योंकि इसी तरह का वायरस पहले भी फैल चुका था। ऐसे चार और इंसानी कोरोना वायरस होते हैं जिनमें जुकाम जैसे लक्षण सामने आते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर से प्रोफेसर ट्रेसी हसल कहती हैं, 'ये नए तरह का वायरस है इसलिए लोगों में इससे लड़ने के लिए पहले से इम्यूनिटी नहीं है। इसके नए प्रभाव आपके इम्यून सिस्टम के लिए एक झटका साबित होते हैं।'