कई महिलाएं जो मां न बनने के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं, उनके लिए एक चौंकाने रिसर्च सामने आई है। दरअसल, गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन करने वाले महिलाओं पर एक शोध की गई है, जिसके मुताबिक गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से बांझपन का खतरा बढ़ सकता है। यह लेख फ्रंटीयर्स इन न्यूरोसाइंस में प्रकाशित किया गया है।
इस स्टडी में पता चला कि गोलियों का इस्तेमाल नहीं करने वाली महिलाओं की तुलना में गर्भनिरोधक दवाइयों के सेवन करने वाली महिलाओं में 10 प्रतिशत बुरा असर दिखा। शोधकर्ताओं ने बताया कि जन्म नियंत्रण के हार्मोन से संबंधी गर्भनिरोधक गोलियां मुंहासे, महावारी और एंडोमेट्रिओसिस को नियंत्रित करने में मददगार हो सकती है।
ग्रीफ्सवाल्ड यूनिवर्सिटी के एलेक्जेंडर लिश्वके के मुताबिक दुनियाभर में 10 करोड़ महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन इससे उनकी भावनाओं और व्यवहार पर पड़ने वाले असर के बारे में बहुत कम जानकारी मिली। हालांकि इन नतीजों में यह सुझाया गया है कि गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाओं में अन्य के भावनात्मक हाव-भावों की पहचान करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से गर्भाशय और पाचन तंत्र के निचले भाग पर स्थित कोलोन के कैंसर का खतरा कम हो सकता है। एंडोमोट्रिओसिस, महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण होने वाली ऐसी बीमारी है जो दर्द, अनियमित मासिक धर्म के साथ बांझपन जैसी गंभीर बीमारियों को लेकर आती है।
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रिसर्च के मुताबिक इसका नकारात्मक प्रभाव यह है कि इन दवाइयों से स्तन और सर्वाइकल कैंसर, खून के थक्के और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है।
नोटः यह लेख आपकी जागरूकता बढ़ाने के लिए साझा किया गया है। किसी बीमारी के पेशेंट हैं अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।