हाल के वर्षों में सभी उम्र के लोगों में हृदय रोग-हार्ट अटैक के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। आए दिन अखबारों में हार्ट अटैक और इससे मौत की खबरें सुर्खियों में रही हैं। ये ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, असंतुलित खान-पान और नींद की कमी ने दिल पर दबाव इतना बढ़ा दिया है कि अचानक होने वाले हार्ट अटैक अब आम हो गए हैं।
Heart Attack: दिन के किस समय हार्ट अटैक का होता है सबसे ज्यादा खतरा? हृदय रोग विशेषज्ञ ने दी इसकी जानकारी
- अगर आपको लगता है कि हार्ट अटैक कभी भी हो सकता है तो ये सही है, पर ये भी जानना जरूरी है कि दिन के कुछ विशेषज्ञ घंटों में इसका जोखिम कई गुना अधिक हो सकता है।
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हार्ट अटैक का खतरा
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. दिमित्री यारानोव बताते हैं, अगर आपको लगता है कि हार्ट अटैक कभी भी हो सकता है तो ये सही है, पर ये भी जानना जरूरी है कि दिन के कुछ विशेषज्ञ घंटों में इसका जोखिम कई गुना अधिक हो सकता है। ये समय है भोर का।
हृदय रोग विशेषज्ञ के कहते हैं ज्यादातर लोग सोचते हैं कि दिल का दौरा अचानक पड़ता है। हालांकि इसका सबसे ज्यादा खतरा सुबह के शुरुआती घंटों में होता है, जब आप अभी बिस्तर पर होते हैं।
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पर इसके पीछे कारण क्या है?
सुबह के समय क्यों बढ़ जाता है हार्ट अटैक का जोखिम
डॉक्टर दिमित्री कहते हैं, रात की समाप्ति और प्रात: काल वह समय होता है जब कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन बढ़ जाते हैं, रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और रक्तचाप बढ़ जाता है। जिन लोगों को पहले से ही उच्च रक्तचाप या धमनियों में प्लाक की दिक्कत रही है उनके लिए यह समय सबसे खतरनाक हो सकता है।
अगर आप दवाइयां लेना छोड़ देते हैं या ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा हुआ रहता है तो इससे हार्ट अटैक का जोखिम और भी बढ़ सकता है।
ब्लड प्रेशर की दवा समय पर लें
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार रक्तचाप की दवा सुबह की बजाय रात में लेने से ज्यादा फायदा हो सकता है। रिपोर्ट में 19,000 से अधिक मरीजो पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि दवा को रात में खाया जाए तो इसका अगले 8-10 घंटे असर रहता है जिससे हृदय संबंधी मृत्यु और बीमारियों का खतरा लगभग आधा हो जाता है।
हालांकि ये आपकी सेहत को देखते हुए डॉक्टर निर्धारित करते हैं कि आपको किस समय दवा लेनी चाहिए।
हृदय रोगों की डराने वाली रिपोर्ट
हृदय रोगों के बढ़ते खतरे को लेकर हाल ही में रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के तहत किए गए सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे की रिपोर्ट में विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि भारत में होने वाली सभी मौतों में से एक-तिहाई का कारण हृदय रोग हैं। दिल की बीमारियां देश में मृत्यु दर का प्रमुख कारण बनी हुए हैं, जो लगभग 31 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।
विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि जिस तरह से लोगों की दिनचर्या, खानपान में गड़बड़ी देखी जा रही है इससे आशंका है कि ये आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।