लॉकडाउन का असर दवाइयों की आपूर्ति पर भले ही ना पड़ा हो लेकिन दवाइयों की बिक्री इससे जरूर प्रभावित हुई है। कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन में एंटीबायोटिक समेत कई और दवाओं की बिक्री में कमी आई है। लोग अब पहले की तरह एंटीबायोटिक दवाएं नहीं खरीद रहे हैं।
एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री में कमी, क्या कम बीमार पड़ रहे हैं लोग?
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भूप्रेंद कुमार ने बताया, “हमें बाजार से फीडबैक मिला है कि लोग अब छोटी-मोटी बीमारियों के लिए दवाएं कम खरीद रहे हैं। ऑगमेंटीन, सेफोरॉक्सिम और सेफिक्जिम जैसे एंटीबायोटिक दवाओं कि बिक्री कम हुई है। इसके अलावा माइग्रेन, डायबिटीज और दौरे जैसी बीमारियों के लिए ली जाने वाली दवाएं भी कम बिक रही हैं। पेन किलर की खरीद भी कम हुई है।”
क्या हैं कारण
बैक्टीरिया को मारने वाली दवाइयों को एंटीबायोटिक कहते हैं। एंटीबायोटिक अलग-अलग इंफेक्शन के इलाज में काम आती है। एंटीबायोटिक की बिक्री कम होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। लेकिन इसके दो बड़े कारण हैं एक तो ये कि लॉकडाउन में अस्पताल में ओपीडी और निजी क्लिनिक का कम खुलना और दूसरा छोटी-मोटी बीमारियों के लिए दवाएं ना लेना।
भूपेंद्र कुमार बताते हैं कि पहले लोग सर्दी, जुकाम, खांसी जैसी बीमारियों के लिए क्लिनिक पर चले जाया करते थे लेकिन लॉकडाउन में क्लिनिक ही बंद हैं। ऐसे में डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं। फिर लोग कोरोना वायरस के डर से खुद भी डॉक्टर के पास जाने से बच रहे हैं। वो केमिस्ट से भी दवाएं नहीं ले रहे बल्कि छोटी-मोटी बीमारियां घरेलू उपायों से या अपने आप ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं।
कम बीमार पड़ रहे लोग
फोर्टिस अस्पताल में न्यूरोलॉजी के डायरेक्टर एवं हेड डॉक्टर प्रवीण गुप्ता बताते हैं कि इस दौरान ये भी देखने को मिल रहा है कि लोग कम बीमार पड़ रहे हैं। इसकी वजह है साफ-सफाई का ज्यादा ध्यान रखना। वह कहते हैं, “पश्चिमी देशों में संक्रामक रोग बहुत कम होते हैं। उसकी सबसे बड़ी वजह है साफ-सफाई। अब भारत में भी लोग कोरोना वायरस के कारण स्वच्छता का ज्यादा ध्यान रख रहे हैं। जिसके कारण उन्हें इंफेक्शन कम हो रहा है। गंदे हाथों से खाना खाने से ये इंफेक्शन शरीर में पहुंच जाता है लेकिन कोविड19 के चलते लोग बार-बार हाथ धो रहे हैं या सेनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में हम ना सिर्फ कोरोना वायरस को रोक रहे हैं बल्कि दूसरी बीमारियों को भी रोक रहे हैं।”