महिलाओं के लिए मां बनना बहुत बड़ा सुख होता है। यह उनके जीवन का एक अनमोल लम्हा होता है। खानपान ठीक न होना, पोषणयुक्त आहार न मिलना, कमजोरी या अन्य कारणों से अगर गर्भपात होता है तो महिलाएं टूट जाती हैं। इससे उनकी जान पर बन आती है। पहले से शरीर में रही बीमारियां भी गर्भपात का कारण बनती हैं। इन्हीं में से एक है- ऑटो इम्यून डिजीज एप्ला(APLA)। इस स्वप्रतिरक्षित यानी ऑटो इम्यून बीमारी का पूरा नाम है एंटीफोसफोलिपिड सिंड्रोम। इस बीमारी में महिला के शरीर में ऐसी कोशिकाएं बनने लगती हैं, जो स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें खत्म कर देती है। आइए, जानते हैं इस बीमारी के बारे में विस्तार से:
महिलाओं में गर्भपात का कारण बनती है यह बीमारी, जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज
यह बीमारी केवल महिलाओं को ही नहीं, बल्कि पुरुषों को भी होती है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वस्थ कोशिकाओं पर हमले से शरीर में खून के थक्के जमने लगते हैं। इस सिंड्रोम का असर शरीर की नसों, धमनियों और अंगों पर पड़ता है। ब्ल्ड सर्कुलेशन यानी रक्त प्रवाह प्रभावित होने के कारण किडनी, फेफड़े, दिमाग, हाथ-पैर और गर्भ आदि अंग प्रभावित होते हैं। इसमें अंगो के निष्क्रिय होने के अलावा गर्भपात जैसी समस्या भी होती हैं।
यह बीमारी पुरुषों की अपेक्षा ज्यादातर महिलाओं में पाई जाती है। इसका कारण आनुवांशिक भी हो सकता है या फिर हार्मोनल भी। एप्ला सिंड्रोम के कारण गर्भपात हो सकता है या फिर बच्चा अविकसित या मृत पैदा हो सकता है। ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने से गर्भ में बच्चे को पोषण नहीं मिल पाता है और वह विकसित नहीं हो पाता है। ऐसे में गर्भधारण के शुरुआती या बाद के महीनों में गर्भपात हो सकता है।
एप्ला सिंड्रोम के कारण
- कई लोगों को ऑटो इम्यून की दूसरी बीमारियां भी होती हैं। हालांकि ज्यादातर में एप्ला सिंड्रोम पाया जाता है।
- इसके कारण आनुवांशिक या हार्मोनल दोनों हो सकते हैं।
- ज्यादा गर्भनिरोधक दवाओं के प्रयोग से भी खून के थक्के जम सकते हैं।
हालांकि, इसके सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। इसके कुछ पर्यावरणीय कारक के अलावा बैक्टीरिया या वायरस या केमिकल या ड्रग्स आदि भी कारण हो सकते हैं। खराब जीवनशैली के चलते भी एप्ला सिंड्रोम का खतरा बढ़ सकता है।
क्या हैं लक्षण
- जोड़ों में दर्द और सूजन, चलने में या उंगलियों को मोड़ने में परेशानी
- मुंह में छाले होना, स्किन रैशेज, आंखों में जलन और बालों का झड़ना
- सिरदर्द, बुखार, छाती में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, वजन कम होना
- थकान, चक्कर आना, महिलाओं में बार-बार गर्भपात होना
- गंभीर स्थिति में शरीर के अंगों का निष्क्रिय होना।