देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच अब म्यूकरमाइकोसिस की दस्तक ने हर किसी को परेशान कर दिया है। देश जहां पहले से ही कोरोना जैसी खतरनाक महामारी से लड़ रहा है, तो वहीं अब म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस के आ जाने से खतरा और बढ़ गया है। देशभर में अलग-अलग राज्यों में इससे संक्रमित मरीज मिले हैं, जिनका इलाज चल रहा है। जबकि इसकी वजह से कई लोगों की आंखें तक निकालनी पड़ी और कई मरीजों की जान भी चली गई। इसी को लेकर अब दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कुछ बातें स्पषट की। तो चलिए जानते हैं इनके बारे में।
म्यूकरमाइकोसिस: ब्लैक फंगस का ऑक्सीजन थेरेपी से क्या संबंध? ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
म्यूकरमाइकोसिस एक घातक और आक्रामक फंगल संक्रमण है, और इसके कई लक्षणों द्वारा इसे पहचाना जा सकता है। इसमें नाक या चेहरे पर कालापन या फिर लाल चकत्ते होना, एक तरफ चेहरे पर सूजन आना, दर्द होना, पलकों पर सूजन, आंखें लाल होना, धुंधला या दोहरा दिखना, सिरदर्द होना, उल्टी में खून आना, दांत में दर्द या दांत का हिलना और सांस लेने में तकलीफ होने जैसे लक्षण शामिल हैं।
#IndiaFightsCorona:
📍#Mucormycosis: A fungal disease on the rise
☑️ Where are these fungi found❓❓❓
▶️Naturally found in air, water and even food.
▶️Enters the body through fungal spores from the air, on skin after a cut, burn or skin injury.#StaySafe #Unite2FightCorona pic.twitter.com/8qAlnrBbU1
इससे उन लोगों को ज्यादा खतरा होता है जिन लोगों की डायबिटीज नियंत्रित न हो, जिन्हें कोरोना के इलाज के दौरान ज्यादा मात्रा में स्टेरॉयड दिया गया हो और जो कैंसर, ट्रांसप्लांट के मरीज हों या फिर जिनकी इम्यूनिटी कमजोर हो।
म्यूकरमाइकोसिस का ऑक्सीजन थेरेपी से सीधा संबंध नहीं
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि, 'म्यूकरमाइकोसिस संक्रमण का ऑक्सीजन थेरेपी से सीधा संबंध नहीं देखा गया है। कई मरीज घर पर अपना इलाज करा रहे हैं और ये लोग ऑक्सीजन थेरेपी पर नहीं थे, लेकिन फिर भी इनमें भी म्यूकरमाइकोसिस का संक्रमण देखा गया।'
म्यूकरमाइकोसिस का नामकरण करना भ्रम पैदा करने जैसा
- डॉक्टर गुलेरिया ने म्यूकरमाइकोसिस के अलग-अलग रंगों के आधार पर रखे जाने वाले इसके नाम को लेकर भी कहा कि, 'एक ही फंगस का अलग-अलग रंगों के आधार पर नामकरण करने से भ्रम पैदा होगा। म्यूकरमाइकोसिस संचारी रोग नहीं है जैसा कि कोरोना वायरस के लगभग 90-95 फीसदी मरीज जो म्यूकरमाइकोसिस से संक्रमित हैं या तो मधुमेह के शिकार हैं या उन्होंने स्टेरॉयड लिया था। ये बीमारी उनमें दुर्लभ है जो मधुमेह के मरीज नहीं है या जिन्होंने स्टेरॉयड नहीं ली है।'