डॉ सौरभ चौधरी
कोविड से जंग: हृदय रोगियों को दी जाने वाली इस दवा से बच सकती है गंभीर कोरोना संक्रमितों की जान
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डॉक्टर बताते हैं कि ब्लड थिनर दवाएं मुख्यरूप से नसों और धमनियों के माध्यम से रक्त के प्रवाह को सुचारू रखने के लिए दी जाती हैं। यह दवाएं रक्त का थक्का बनने से भी रोकती हैं। सामान्यतौर पर हृदय और अन्य रोगियों, जिनमें रक्त का थक्का बनने की आशंका अधिक होती है, उन्हें यह दवाएं दी जाती रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 में थ्रोम्बोइम्बोलिज्म फेनोमेना (रक्त का थक्का जमने) के मामले बहुत अधिक देखने को मिल रहे हैं। कोरोना के वायरस फेफड़ों में रक्त के थक्कों का तेजी से निर्माण करते हैं। इन समस्याओं को देखते हुए कोविड के रोगियों को ब्लड थिनर दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि जरूरी नहीं है कि कोविड के हर रोगी को इन दवाइयों की आवश्यकता हो।
खुद से ही न शुरू करें ब्लड थिनर दवाओं का सेवन
डॉक्टरों का कहना है कि रक्त को पतला करने वाली दवाओं का खुद से इस्तेमाल शुरू कर देना खतरनाक हो सकता है। संक्रमण वाले हर रोगी में खून के थक्के जमने की समस्या नहीं देखी जा रहा है, ऐसे में इन दवाओं की आवश्यकता के बिना इस्तेमाल अन्य गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है। खून के थक्के जमने की स्थिति का पता लगाने के लिए डी-डिमर और फाइब्रिनोजेन जैसे परीक्षणों का आवश्यकता होती है, इन्हीं रिपोर्टस के आधार पर दवाओं का निर्धारण किया जाता है।
खून के थक्कों का पता कैसे किया जाता है?
कोविड की गंभीर स्थितियों में डी-डिमर टेस्ट के माध्यम से रक्त के थक्कों के बारे में पता लगाया जाता है। कोविड के समय यह वायरस फेफड़ों में रक्त के थक्के बनाना शुरू कर देता है, जिसकी वजह से रोगियों को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। थक्का जमने से रक्त प्रवाह भी बाधित होता है। इस टेस्ट को करने के लिए डॉक्टर ब्लड सैंपल लेते हैं। इस टेस्ट के माध्यम से निर्धारित किया जाता है कि किन रोगियों को ब्लड थिनर दवाओं की जरूरत हो सकती है?
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नोट: यह लेख छाती रोग विशेषज्ञ डॉ सौरभ चौधरी बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें तथा किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें।