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पितृपक्ष 2026: पिंडदान के लिए गया, हरिद्वार या उज्जैन जाना है? यहां तारीख, खर्च और जरूरी नियम

Mon, 21 Sep 2026 02:00 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Mon, 21 Sep 2026 02:00 PM IST
सार

Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष 26 सितंबर 2026, शनिवार से शुरू होगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध है, जबकि 27 सितंबर से कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के साथ पितृपक्ष का मुख्य क्रम शुरू होता है। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।

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Pitru Paksha 2026: Gaya, Haridwar or Ujjain? Complete Pind Daan Guide, Rules and Travel Cost
इस पितृ पक्ष में पिंड दान कहां करें - फोटो : Ai

Pind Daan 2026: पितृपक्ष हिंदू परंपरा में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और याद करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान कई परिवार अपने पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। पिंडदान के लिए गया, हरिद्वार और उज्जैन जैसे तीर्थस्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। साल 2026 में गया का पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होगा। गया में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और अन्य प्रमुख स्थलों पर पिंडदान की परंपरा है। बिहार पर्यटन के मुताबिक गया में 48 प्रमुख वेदियां हैं।



हालांकि पिंडदान की विधि, संकल्प, सामग्री और दक्षिणा परिवार की परंपरा तथा स्थानीय पुरोहित की सलाह के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए यात्रा से पहले संबंधित तीर्थ के स्रोतों और विश्वसनीय पुरोहित से प्रक्रिया की पुष्टि करना बेहतर है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष पितरों का पिंड दान करने के लिए कहां जा सकते हैं, यात्रा से जुड़ी जानकारी भी जानिए।

पितृपक्ष कब से हैं 2026?

पितृपक्ष 26 सितंबर 2026, शनिवार से शुरू होगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध है, जबकि 27 सितंबर से कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के साथ पितृपक्ष का मुख्य क्रम शुरू होता है। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।

Pitru Paksha 2026: Gaya, Haridwar or Ujjain? Complete Pind Daan Guide, Rules and Travel Cost
गया में पिंडदान - फोटो : amar ujala

गया में पिंडदान

गया को पितृ कर्म के प्रमुख तीर्थों में माना जाता है। बिहार पर्यटन के अनुसार फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर, पंचतीर्थ, सीता कुंड और गया शिरोमणि मंदिर प्रमुख पिंडदान स्थलों में शामिल हैं। यहां पुरोहितों की सहायता से तर्पण और पिंडदान की विधि कराई जाती है।

गया में पिंडदान के लिए एक दिन में लगभग 11,250 से 16,650 रुपये प्रति व्यक्ति खर्च आ सकता है। इनमें यात्रा, पूजा सामग्री, पिंडदान और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। यह पिंडदान की केवल एक आधिकारिक पैकेज-आधारित लागत है, सामान्य या व्यक्तिगत पूजा की अनिवार्य फीस अलग हो सकती है।

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IRCTC Haridwar Tour Package - फोटो : AdobeStock

हरिद्वार में पिंडदान

हरिद्वार में गंगा तट पर श्राद्ध, तर्पण और पितृ कर्म से जुड़े अनुष्ठान किए जाते हैं। यहां जाने से पहले परिवार की परंपरा के अनुसार आवश्यक पूजा सामग्री, संकल्प और अनुष्ठान की जानकारी संबंधित पुरोहित से ले लें।

हरिद्वार की यात्रा का कुल बजट पिंडदान की दक्षिणा के अलावा ट्रेन या फ्लाइट, होटल, स्थानीय परिवहन और भोजन पर निर्भर करेगा। पितृपक्ष के दौरान तीर्थस्थलों पर भीड़ बढ़ सकती है, इसलिए होटल और यात्रा की बुकिंग पहले करना उपयोगी रहेगा।

 

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बाब महाकाल मंदिर में मनाई गई दीपावली। - फोटो : अमर उजाला

उज्जैन में पिंडदान

उज्जैन भी धार्मिक अनुष्ठानों और पितृ कर्म के लिए जाना जाता है। यहां जाने वाले श्रद्धालुओं को स्थानीय पुरोहित से पूजा की विधि, स्थान, सामग्री और दक्षिणा पहले स्पष्ट कर लेनी चाहिए। उज्जैन यात्रा का खर्च भी आपके शहर से आने-जाने, ठहरने, स्थानीय परिवहन और पूजा की व्यवस्था के आधार पर अलग-अलग होगा। किसी एक तय रकम को सभी श्रद्धालुओं के लिए लागू नहीं माना जा सकता।

गया, हरिद्वार या उज्जैन, कैसे करें तैयारी?

अगर आपका मुख्य उद्देश्य पितृपक्ष में पिंडदान है, तो सबसे पहले परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह के अनुसार स्थान तय करें। इसके बाद यात्रा, होटल, स्थानीय परिवहन और पूजा की व्यवस्था अलग-अलग बजट में प्लान करें। ध्यान रखें कि पिंडदान की धार्मिक विधि और खर्च व्यक्ति, परिवार की परंपरा, स्थान और चुनी गई सेवाओं के अनुसार बदल सकते हैं।

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पिंड दान - फोटो : Adobe

पिंडदान के लिए क्या सामान चाहिए?

आम तौर पर पिंडदान और श्राद्ध में पूजा सामग्री का उपयोग परंपरा के अनुसार किया जाता है। हालांकि सामग्री की सूची स्थान और अनुष्ठान की विधि के अनुसार बदल सकती है। इसलिए स्थानीय पुरोहित से पहले ही पूरी सूची पूछना बेहतर है।

 

  • तिल
  • कुश
  • जल
  • चावल
  • आटे से बने पिंड


पितृपक्ष में किन बातों का ध्यान रखें?

पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार आहार और आचरण का पालन करते हैं। बिहार पर्यटन की जानकारी में गया के पितृपक्ष के संदर्भ में मांसाहार से परहेज सहित कुछ खाद्य-पदार्थों से बचने की परंपरा का उल्लेख है।

सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी अनुष्ठान को लेकर डर या दबाव में निर्णय न लें। दक्षिणा, पूजा पैकेज, सामग्री और अतिरिक्त सेवाओं की कीमत पहले स्पष्ट कर लें और संभव हो तो भुगतान से पहले रसीद या बुकिंग विवरण जरूर लें।

 

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