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Alert: हर 10 में से चार लोगों को है लिवर की ये गंभीर बीमारी, कहीं आपमें भी तो नहीं हैं ऐसे लक्षण?

Thu, 14 Nov 2024 07:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 14 Nov 2024 07:17 PM IST
सार

नेचर कम्युनिकेशंस मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक शोध में पाया गया है कि दुनियाभर में फैटी लिवर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। भारतीय आबादी में भी एनएएफएलडी का खतरा अधिक देखा गया है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट करते हैं।

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4 In 10 Adults Suffer From Fatty Liver Disease know its risk and health effects
लिवर की बढ़ती बीमारी - फोटो : Freepik.com

दुनियाभर में कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का जोखिम पिछले एक-दो दशकों में काफी तेजी से बढ़ा है। डायबिटीज, हृदय रोगों से बड़ी आबादी प्रभावित देखी जा रही है, ये तो गंभीर समस्या है ही साथ ही लिवर और किडनी से संबंधित बीमारियां भी स्वास्थ्य क्षेत्र पर दवाब बढ़ाती जा रही हैं। फैटी लिवर डिजीज ऐसी ही तेजी से उभरती समस्या है जिससे वयस्क आबादी काफी ज्यादा प्रभावित है। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन के डेटा और भी चिंता बढ़ा रहे हैं।



नेचर कम्युनिकेशंस मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक शोध में पाया गया है कि दुनियाभर में फैटी लिवर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अकेले अमेरिका में ही हर 10 में से चार लोग फैटी लिवर की समस्या से परेशान हैं। 

इंस्टीट्यूट फॉर लिवर डिजीज एंड मेटाबोलिक हेल्थ में लिवर रोगों के विशेषज्ञ डॉ. जुआन पाब्लो अरब ने लिवर की इस बढ़ती बीमारी को लेकर सभी लोगों को सावधान रहने और बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की सलाह दी है।

4 In 10 Adults Suffer From Fatty Liver Disease know its risk and health effects
फैटी लिवर की समस्या - फोटो : Freepik.com

बढ़ रहे हैं फैटी लिवर के मरीज

डॉ. जुआन के नेतृत्व वाली टीम के अनुसार, साल 2018 तक के आंकड़ों से पता चला है कि 42% वयस्कों को किसी न किसी प्रकार का फैटी लिवर रोग था। ये पिछले अनुमानों से अधिक है। लिवर की बढ़ती समस्याओं के लिए शराब पीने की आदत को प्रमुख माना जाता रहा है, हालांकि जो लोग शराब नहीं पीत हैं उन्हें भी ये दिक्कत हो सकती है। इसे नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) कहा जाता है।

भारतीय आबादी में भी एनएएफएलडी का खतरा अधिक देखा गया है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट करते हैं।

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फैटी लिवर की समस्या खतरनाक - फोटो : Freepik.com

भारत में एनएएफएलडी का जोखिम

इसी साल जुलाई में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चौंकाने वाले डेटा से लोगों को अवगत कराया था। केंद्रीय मंत्री ने बताया, देश में हर तीसरे व्यक्ति को फैटी लिवर डिजीज की समस्या हो सकती है। मधुमेह और अन्य मेटाबॉलिक विकारों के कारण होने वाली इस बीमारी का खतरा उन लोगों में भी तेजी से बढ़ाता हुआ देखा जा रहा है, जो लोग शराब भी नहीं पीते हैं। 

पश्चिमी देशों में नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) के ज्यादातर मामले मोटापे के शिकार लोगों में देखे जाते रहे हैं हालांकि भारत में देखा जा रहा है कि बिना मोटापे वाले करीब  20 फीसदी लोग भी इसका शिकार देखे जा रहे हैं।

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लिवर का रखें ख्याल - फोटो : Adobe stock

क्या है नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज?

नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज, लिवर की बीमारी है जिसमें लिवर में बहुत अधिक वसा जमा होने लगती है। इससे इस अंग का सामान्य कार्य प्रभावित होने लग जाता है। विशेषज्ञों को ठीक से पता नहीं है कि लिवर में वसा बनने के लिए क्या कारण जिम्मेदार हैं, हालांकि जीवनशैली के कारक इसका खतरा बढ़ाने वाले माने जाते हैं।

अध्ययन में  एनएएफएलडी और कई प्रकार की मेटाबॉलिक बीमारियों जैसे मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों के बीच संबंध पाया गया है। नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर के शिकार लोगों की निरंतर देखभाल और इलाज बहुत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा इस रोग के बढ़ते जोखिमों को कम करने के लिए लाइफस्टाइल और आहार दोनों में सुधार किया जाना चाहिए। 

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खान पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए करें उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लिवर से संबंधित गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि आप वजन को कंट्रोल रखें। स्वस्थ आहार लें जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा भरपूर मात्रा में हो। इसके अलावा शराब, चीनी और नमक की सेवन कम से कम करें। सोडा, स्पोर्ट्स ड्रिंक, पैक्ड जूस और अन्य मीठे पेय पदार्थों के अधिक सेवन के कारण भी आप फैटी लिवर के शिकार हो सकते हैं। 

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट के व्यायाम की आदत बनाइए। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वाले लोगों में क्रोनिक बीमारियों का खतरा कम देखा जाता रहा है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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