पिछले एक दशक के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि देश में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर से लेकर कैंसर जैसी बीमारी बड़ा खतरा बनकर उभरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ बीमारियां विशेषतौर पर महिलाओं को प्रभावित करती हैं, सही जानकारी के अभाव में इनका निदान और उपचार न होने के कारण गंभीर स्थितियां विकसित होती भी देखी गई हैं।
चिंताजनक: 4.3 करोड़ से अधिक भारतीय महिलाएं इस गंभीर बीमारी की शिकार, अलर्ट- इससे बांझपन का बढ़ सकता है खतरा
दुनियाभर में बढ़ रही है ये बीमारी
आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर प्रजनन आयु वाली लगभग 190 मिलियन (19 करोड़) लड़कियों और महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस की समस्या हो सकती है। वहीं भारत में 15 से 49 वर्ष की प्रजनन आयु वाली 10 फीसदी महिलाओं में इस समस्या का पता चला है।
जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ में भारत के शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट में बताया कि भारत सहित दुनिया के कई देशों में एंडोमेट्रियोसिस पर बहुत कम या बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। चिंताजनक बात ये है कि अधिकतर महिलाएं भी इस स्वास्थ्य समस्या से अनजान हैं। जागरूकता की कमी के कारण रोग का समय रहते इलाज और उपचार भी नहीं हो पाता है।
एंडोमेट्रियोसिस और इसके कारण होने वाली समस्याएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं में कई प्रकार के जटिल लक्षणों के साथ अक्सर दर्द (पेल्विक, पीठ-पेट) की दिक्कत बनी रहती है। मासिक चक्र के दौरान शरीर में हार्मोनल परिवर्तन के कारण एंडोमेट्रियल (गर्भाशय की परत) जैसे ऊतक में कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं और फिर इनका ब्रेक डाउन होता है, जो रक्तस्राव की समस्या का कारण बन सकती हैं।
पीरियड्स के दौरान, मासिक धर्म का रक्त तो शरीर से बाहर निकल जाता है पर कोशिकाओं के ब्रेक डाउन से होने वाला रक्तस्राव शरीर के अंदर ही रह जाता है जिससे इंफ्लामेशन और इसके कारण होने वाली कई बीमारियों का खतरा हो सकता है। अगर समय रहते इस समस्या का सही निदान और उपचार न किया जाए तो इसके कारण प्रजनन विकारों की समस्या भी हो सकती है।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
संस्थान में भारत के वैश्विक महिला स्वास्थ्य कार्यक्रम की सीनियर रिसर्च फेलो डॉ. प्रीति राजबांग्शी कहती हैं, मासिक धर्म में होने वाले दर्द पर ध्यान न देना और एंडोमेट्रियोसिस की समस्या को लेकर जागरूकता की कमी के कारण इस बीमारी का समय पर पता नहीं चल पाता है जो अंदर ही अंदर गंभीर समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।
शोधकर्ता कहती हैं, हमारे निष्कर्ष महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस के शीघ्र निदान और उपचार में सुधार की आवश्यकताओं को लेकर लोगों को जागरूक करने पर जोर देते हैं। इसके लक्षणों पर ध्यान देकर डॉक्टरी सलाह लेना बहुत जरूरी है।
कैसे करें इस रोग की पहचान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं एंडोमेट्रियोसिस की समस्या वाली महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान ऐंठन और दर्द, मासिक धर्म के बीच में पेट या पीठ में गंभीर दर्द, सेक्स के दौरान दर्द, पीरियड्स के दौरान भारी रक्तस्राव हो सकती है। एंडोमेट्रियोसिस की समस्या, पर अगर ध्यान न दिया जाए तो ये गर्भधारण करने में कठिनाई का कारण भी बन सकती है।
अगर आपके परिवार में पहले से किसी को ये दिक्कत रही है तो एंडोमेट्रियोसिस का खतरा आपको भी हो सकता है। मासिक धर्म के दौरान होने वाली समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देते रहना आवश्यक हो जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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