कश्मीर में एक फरवरी से 20 दिन का चिल्ले खुर्द शुरू हो चुका है। कश्मीर में ठंड की 40 दिन की अवधि वाला चिल्ले कलां जाते-जाते अपना रंग दिखा गया। श्रीनगर में तीस साल बाद शनिवार की रात सबसे ठंडी रही। शनिवार की रात का न्यूनतम तापमान माइनस 8.8 डिग्री दर्ज किया गया। यह वर्ष 1991 के बाद अब तक का सबसे न्यूनतम तापमान है। फिलहाल अभी ठंड से राहत मिलने के आसार नहीं हैं।
कश्मीर में आज से चिल्ले खुर्द शुरू, फिलहाल ठंड से राहत की उम्मीद नहीं, बिजली-पानी का संकट
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मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार, पिछले 38 वर्षों के दौरान श्रीनगर का न्यूनतम तापमान 17 बार माइनस 8.8 अथवा इससे अधिक दर्ज किया गया। इसमें वर्ष 1991 सबसे ठंडा साल रहा था, जिसमें 9 दिन तक तापमान माइनस 11.4 अथवा इसके आसपास रहा। शनिवार को दर्ज किया गया तापमान 1991 के बाद से अब तक का सबसे कम न्यूनतम तापमान है। श्रीनगर में इसी वर्ष 13 जनवरी को तापमान शून्य से 8.4 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया था। रविवार को प्रदेश में पहलगाम सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां तापमान शून्य से 12 डिग्री नीचे दर्ज किया गया।
घाटी में भीषण ठंड की वजह से जलस्रोत जम गए हैं, पाइपलाइनों में भी पानी जम गया है। कई इलाकों में बिजली नहीं है। पाइपलाइनों में पानी जमने से सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को हो रही है। रोजमर्रा की जिंदगी पर इसका गहरा असर पड़ा है।
फिलहाल इस ठंड से लोगों को तत्काल राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार एक से तीन फरवरी के दौरान विशेष रूप से कश्मीर घाटी के कुछ इलाकों में बारिश होने की संभावना है। जिसकी वजह से न्यूनतम तापमान में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के बाहरी इलाकों और लद्दाख में हल्की बर्फबारी हो सकती है।
चालीस दिन तक ठंड का जोरदार अहसास कराने वाला चिल्ले कलां रविवार को खत्म हो गया और बीस दिन की अवधि वाला चिल्ले खुर्द सोमवार से शुरू हो गया। लेकिन कश्मीर के लोगों को अभी ठंड से राहत नहीं मिली है और अगले कुछ दिनों तक तापमान शून्य से नीचे ही रहने की संभावना है। इसके ठीक अगले दस दिन चिल्ले बच्चा का दौर रहेगा। इस अवधि में भी ठंड और बर्फबारी का दौर जारी रहता है।