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J&K: श्रीनगर के विचारनाग मंदिर में 35 साल बाद नवरेह महोत्सव, हरियाणा के राज्यपाल भी पहुंचे, गूंजे जयघोष

Tue, 09 Apr 2024 04:25 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 09 Apr 2024 04:25 PM IST
सार

श्रीनगर के ऐतिहासिक विचार नाग मंदिर में सप्तऋषि संवत 5100 धूमधाम से मनाया। 35 वर्षों के बाद इस मंदिर में नवरेह महोत्सव का आयोजन किया गया।

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Shiv temple reopen in Srinagar Soura after 35 years special worship performed on Navreh
घाटी में शिव मंदिर में हुई विशेष पूजा - फोटो : बासित जरगर

विश्व कश्मीरी समाज के बैनर तले कश्मीरी पंडितों और स्थानीय लोगों ने मंगलवार को श्रीनगर के ऐतिहासिक विचार नाग मंदिर में सप्तऋषि संवत 5100 धूमधाम से मनाया। 35 वर्षों के बाद इस मंदिर में नवरेह महोत्सव का आयोजन किया गया। समारोह में स्थानीय और कश्मीर के बाहर से आए कश्मीरी पंडितों ने भाग लिया। हरियाणा के राज्यपाल बंगारू दत्तात्रेय इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और पूजा में हिस्सा लिया।

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घाटी के शिव मंदिर में हुई विशेष पूजा - फोटो : बासित जरगर

विश्व कश्मीरी समाज के संयोजक किरण वट्टल ने सप्तऋषि कैलेंडर के महत्व और विचारनाग मंदिर के इतिहास के बारे में बताया। उन्होंने इस तरह के आयोजनों को न केवल कश्मीरी पंडितों, बल्कि पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण बताया। 

राज्यपाल बंगारू दत्तात्रेय ने कश्मीरी पंडितों की सभा को संबोधित किया और सनातन धर्म, ज्ञान प्रणाली, आध्यात्मिक चेतना के विकास में कश्मीर के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कश्मीर के मंदिरों के जीर्णोद्धार और गौरव को बहाल करने का आश्वासन दिया।

Shiv temple reopen in Srinagar Soura after 35 years special worship performed on Navreh
घाटी के शिव मंदिर में हुई विशेष पूजा - फोटो : बासित जरगर

राज्यपाल ने सप्तऋषि प्रणाली के 5100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विश्व कश्मीरी समाज द्वारा प्रकाशित एक विशेष कैलेंडर भी जारी किया और विजयेश्वर जंत्री यूएसए व कनाडा संस्करण 2024-25 का विमोचन किया, जिसे डॉ. मनमोहन ज्योतिष रिसर्च फाउंडेशन (एक सामाजिक-धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठन) की ओर से प्रकाशित किया गया है। 

इसे अमेरिका और कनाडा में रहने वाले कश्मीरी पंडितों के लिए पुनीत और सुनीत ज्योतिष द्वारा संपादित किया गया है। राज्यपाल ने प्रतिकूल परिस्थितियों में ऐसे धार्मिक आयोजनों के लिए विश्व कश्मीरी समाज की भूमिका की सराहना की और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों को भी सराहा। इसी विषय पर अमित रैना द्वारा लिखित और प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया।

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घाटी के शिव मंदिर में हुई विशेष पूजा - फोटो : बासित जरगर

विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय हरियाणा के वीसी प्रो. राज नेहरू व महर्षि वाल्मिकी संस्कृत विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने कश्मीर शैववाद के शोध पर एक सीट की घोषणा की और कश्मीर शैववाद की महानता को सामने लाया। समारोह में स्थानीय बालक-बालिकाओं ने योगाभ्यास भी किया। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक टेलीफोनिक संदेश के माध्यम से कश्मीरी हिंदुओं को नवरेह की शुभकामनाएं दीं।

इसके हरियाणा के राज्यपाल मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुला गांव में स्थित ऐतिहासिक खीर भवानी मंदिर में पहुंचे। यहां डीसी श्यामबीर सिंह और मंदिर प्रबंधन के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। दत्तात्रेय को मंदिर के इतिहास के बारे में अवगत कराया गया। उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना में भी भाग लिया। जल कुंड में खीर और दूध का भोग भी चढ़ाया।

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घाटी के शिव मंदिर में हुई विशेष पूजा - फोटो : बासित जरगर

मंदिर में 1990 से पहले चैत्र अमावस्या पर मनाया जाता था त्योहार

श्रीनगर के विचारनाग मंदिर का इतिहास विचार नाग चर्चा का केंद्र था और इसी मंदिर में कश्मीरी ब्राह्मण पंचांग पर चर्चा करते थे। ऐसा माना जाता है कि जगत गुरु शंकराचार्य भी चर्चा के लिए इस मंदिर में आए थे। कश्मीर हमेशा शिक्षा का केंद्र रहा है और ऐसा माना जाता है कि दूसरी चौथी बौद्ध परिषद (सर्वास्तिवाद परंपरा) कुषाण सम्राट कनिष्क (आर। 127-151 सीई) द्वारा बुलाई गई थी। मंदिर में 1990 से पहले कश्मीरी कैलेंडर के आखिरी दिन चैत्र अमावस्या पर इस स्थान पर त्योहार मनाया जाता था। इस दिन भक्त पवित्र झरने में स्नान करते थे और उसके बाद 'विचार साहिब' के नाम से जाने जाने वाले शिव मंदिर में पूजा करते थे।

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