इस साल अमरनाथ यात्रा न शुरू किए जाने पर पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया, क्या कुंभ का आयोजन होना चाहिए था? जिसकी वजह से तबाही मची हुई है। महबूबा ने कहा कि ये फैसला तो दिल्ली में बैठी सरकार करती है। क्या होना चाहिए और क्या नहीं इस संबंध में सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों से कभी राय नहीं लेती। महबूबा ने कहा कि सरकार को प्रदेश के युवाओं के भविष्य की तनिक भी चिंता नहीं है। वहीं, परिसीमन प्रक्रिया में नेशनल कांफ्रेंस के शामिल होने पर पूछे गए सवाल के जवाब उन्होंने कहा कि ये तो उनकी मर्जी है।
अमरनाथ यात्रा पर सरकार से सवाल: महबूबा बोलीं- क्या कुंभ का आयोजन होना चाहिए था? ये आरोप भी लगाया
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श्राइन बोर्ड से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार कोरोना संक्रमण को देखते हुए अमरनाथ यात्रा न कराने का सैद्धांतिक तौर पर फैसला ले लिया गया है। हालांकि, सभी पारंपरिक पूजन पहले ही की तरह होंगे। छड़ी निकलेगी और ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पूजन भी होगा। इस साल श्राइन बोर्ड ने 28 जून से अमरनाथ यात्रा शुरू कराने का फैसला किया था। पहले दिन उप राज्यपाल एवं अन्य लोग बाबा बर्फानी की पूजा अर्चना करेंगे।
सूत्रों ने बताया कि बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस बार हेलिकॉप्टर सेवा श्रीनगर से ही शुरू किए जाने का विकल्प तलाशा जा रहा था। इसके लिए निविदाएं भी आमंत्रित की गई थीं। इसके लिए 31 मई तक तिथि बढ़ाई गई। इच्छुक कंपनियों का किराया अधिक होने के चलते इस प्रस्ताव को अब खारिज कर दिया गया है। बोर्ड प्रशासन ने बाबा के दर से सुबह-शाम की आरती के लाइव प्रसारण के लिए करार कर लिया है। नियमित रूप से पवित्र गुफा से आरती का प्रसारण होगा। बाबा भोले के भक्त देशभर से मां वैष्णो की तरह आरती का लाइव प्रसारण देख सकेंगे।
श्राइन बोर्ड के एक जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि इस बार अमरनाथ यात्रा न कराने का फैसला कर लिया गया है। चूंकि, अभी कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा है। इस महीने के आखिर तक संक्रमण दर शून्य प्रतिशत तक होने की उम्मीद है। हवाई यात्रा का विकल्प भी काफी महंगा है, वह भी आम श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी नहीं होगा। इन सभी वजहों से यात्रा न कराने का निर्णय किया गया है। इस सबके बावजूद गृह मंत्रालय ने यात्रा कराने के लिए कहा तो प्रशासन इसके लिए पूरी तरह तैयार है।
इस बार बोर्ड ने युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू की थीं। उप-राज्यपाल और श्राइन बोर्ड के सीईओ की अध्यक्षता में कई बैठकें हो चुकी थीं। अखाड़ा परिषद को भी न्योता देने का फैसला किया गया था। उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बार छह लाख श्रद्धालु पहुंचेंगे। ऑनलाइन यात्रा पंजीकरण भी शुरू किया गया था, लेकिन अप्रैल में संक्रमण बढ़ने पर इसे रोकना पड़ा। उधर, अब तक लंगर समितियों को भी अनुमति नहीं दी गई है। लंगर समितियों के संगठन साबलो ने पिछले दिनों उप-राज्यपाल प्रशासन से यात्रा पर जल्द फैसला लेने और समितियों को अनुमति देने का आग्रह किया था। बता दें कि बाबा बर्फानी इस साल पूर्ण आकार में है। पवित्र गुफा से हाल के दिनों में वायरल फोटो और वीडियो में बाबा अमरनाथ पूर्ण आकार में दिख रहे हैं। गुफा के आस-पास अभी भी बर्फ जमी है।