एक्सक्लूसिवः श्रीनगर में खुलने लगे बाजार, हर गतिविधि पर सुरक्षा बलों की पैनी नजर, कुछ ऐसा बोले लोग
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अनुच्छेद 370 हटाने के लगभग एक महीने बाद जम्मू-कश्मीर में जिंदगी पटरी पर है। सुरक्षाकर्मी हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं तो आम लोग भी शहर को सामान्य देखना चाहते हैं। जम्मू से श्रीनगर तक का पौने तीन सौ किलोमीटर का मार्ग जो इन दिनों पर्यटकों से भरा रहता था, अब पर्यटकों के इंतजार में है। हालांकि कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन लोग श्रीनगर का रूख नहीं कर रहे हैं।
जम्मू और उधमपुर पूरी तरह सामान्य हैं तो रामबन और बनिहाल में भी किसी तरह की दिक्कत नजर नहीं आती। बाजार रोजाना की तरह खुलता है और रोजाना की तरह स्कूल भी। बाजार में खरीदार भी हैं। इससे आगे जवाहर टनल से निकलते ही सीआरपीएफ की गाड़ियां आभास कराती हैं कि हम हाई सिक्योरिटी जोन में पहुंच चुके हैं।
हर वाहन को चेक करने के साथ हर यात्री की आईडी को चेक करके आगे रवाना किया जा रहा है। कुछ आगे चलते हैं तो लगभग हर 500 मीटर पर जवान तैनात हैं। हर आने-जाने वाहन पर इन जवानों की नजर है तो वाहन के अंदर बैठे यात्रियों की गतिविधियों पर भी।
सब कुछ ठीक है, पर फोन सेवा शुरू कर देनी चाहिए- मोमीन
राजधानी श्रीनगर में कड़ी सुरक्षा है पर जनजीवन पटरी पर है। सड़कों पर रोजाना की तरह वाहन हैं। आने-जाने वालों की भी कमी नहीं। वाहनों के बीच में सुरक्षाबलों की गाड़ियां भी नजर आती हैं। बाजार अपेक्षाकृत कम खुले हैं लेकिन जो भी दुकानें खुलीं हैं, उनमें ग्राहकों की भीड़ नजर आ रही है। पूरे शहर में कहीं भी विरोध जैसी बात नहीं है।
एक रेस्तरां के मालिक ने बताया कि बाजार बंद करने के आदेश नहीं हैं, लेकिन कुछ दुकानदार किसी अनहोनी की आशंका से दुकान नहीं खोल रहे हैं। सरकारी ऑफिस और स्कूल खुले हैं। स्कूलों में बच्चों की संख्या अभी कम ही है। लोग बेबाकी से बात करते हैं।
डल चौराहे से फल खरीद रहे मोमीन कहते हैं कि सब कुछ ठीक है, पर आपात स्थिति के लिए फोन सेवा शुरू कर देनी चाहिए। अजीम कहते हैं कि अनुच्छेद 370 हटने से सबसे ज्यादा दिक्कत राजनीतिक दलों को हुई है, आम लोगों को नहीं। आम लोगों के लिए अपना काम अपना रोजगार ही जरूरत है। इसलिए पाबंदी भी दलों पर ही लगनी चाहिए थी। एटीएम खुले हैं, पेट्रोल पंप पर भी हालात सामान्य है।
सियासत ने मुददे को बड़ा बना दिया- मंजूर अहमद डार
डल झील पर बना टैक्सी स्टैंड सूना पड़ा है। टैक्सी चलाने वाले आदिल बताते हैं कि लोग आएं तो रोजगार चले। लोग नहीं आएंगे तो हमारा पेट कैसे भरेगा। हम नहीं चाहते कि श्रीनगर बदनाम हो। शहर के हालात जल्द से जल्द सामान्य होने चाहिए।
जवाहर टनल के बाद का हिस्सा दक्षिणी कश्मीर में आता है। यहां सुरक्षा की चुनौतियां नजर आती हैं। काजीगुंड शहर में प्रवेश करते ही सेब से लदे बाग नजर आते हैं। गाड़ी रोककर लोगों से बात की जाती है तो बताया जाता है कि पाबंदी जैसी कोई स्थिति नहीं है। जवान सहयोग कर रहे हैं।
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यहां मौजूद मंजूर अहमद डार बताते हैं कि सियासत ने मुददे को बड़ा बना दिया। मामला इतना बड़ा नहीं था। विपक्षी पार्टियों को विरोध किस बात का है, समझ नहीं आता। दक्षिणी कश्मीर का ही अनंतनाग जिला आतंकवाद ग्रसित है। अनंतनाग ही अमरनाथ का पारंपरिक मार्ग है। पहले यहां अमरनाथ यात्रा को लेकर कड़ी सुरक्षा थी तो अब अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर। यहां पत्थरबाजी की छोटी-मोटी घटनाओं की सूचना आती रहती है, लेकिन सुरक्षा में कोई समझौता नहीं।
कुछ लोग बात करने को तैयार हुए तो चेहरा ढककर
अनंतनाग के लोग आमतौर पर मीडिया से बात करना नहीं चाहते। कुछ लोग बात करने को तैयार हुए तो चेहरा ढककर। लोग खुलकर कुछ नहीं बोलते, लेकिन ये जरूर कहते हैं कि हम आतंक से तंग आ चुके हैं आरपार की लड़ाई जरूरी है। दुकान का आधा शटर खोलकर बैठे दुकानकर एजाज बताते हैं कि हमें पता नहीं कि दुकान खोलनी है या नहीं।
हम दुकान खोलना चाहते हैं, लेकिन आसपास की दुकानें बंद हैं। प्रशासन भी दक्षिणी कश्मीर को आमतौर पर सामान्य नहीं बताता। एक माह पहले गुलजार रहा पहलगाम अब सुनसान नजर आ रहा है। होटल सुनसान हैं। होटल चला रहे लोग बताते हैं कि जब लोग ही नहीं तो होटल चलेंगे कैसे।
पुलवामा, शोपिया और त्राल कस्बे के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं। हालात सामान्य नजर आ रहे हैं, सुरक्षा मुस्तैद है। बाजार लगभग बंद है। उत्त्तरी कश्मीर के जिले बारामुला, कूपवाड़ा की हालत दक्षिणी कश्मीर से बेहतर है। बारामूला के अधिकांश बाजार खुले हैं तो लोग भी रोजाना के कामकाज में जुटे हैं।