कश्मीर का 'मांझी' : महीनों से पत्थरों में तलाश रहा है पत्नी को
कभी वीरान आंखों से घंटों आसमान तकता रहता है तो कभी कुदाल लेकर पत्थरों का सीना तोड़ने लगता है। इन बेजान पत्थरों में ही कहीं उसकी जिंदादिल पत्नी सत्या के अवशेष मिल जाएंगे, यह उम्मीद 16 महीनों में पल भर को भी टूटी नहीं है। किस्सों जैसी यह हकीकत सद्दल गांव के कपूर सिंह की है।
कश्मीर का 'मांझी' : महीनों से पत्थरों में तलाश रहा है पत्नी को
उधमपुर जिले का यह गांव 7 सितंबर 2014 को आए ज़लज़ले में जमींदोज हो गया था। कपूर के कुनबे के सात लोग भी दब गए। छह के शव तो मिल गए, लेकिन कपूर की पत्नी अभी तक नहीं मिली। कपूर की बेमकसद की जिंदगी का इकलौता मकसद अब अपनी सत्या की तलाश ही रह गया है।
कश्मीर का 'मांझी' : महीनों से पत्थरों में तलाश रहा है पत्नी को
चट्टानों के बीच किसी के खुदाई करने की आवाज सुनाई देती है तो लोग समझ जाते हैं कि यह कपूर ही होगा। यहीं उससे कुछ ही दूरी पर मलबे से पत्थर और लकड़ी हटाता एक और शख्स नजर आता है। यह गिरधारी लाल है। खुदाई करते उसे जो सामान मिलता है, वह उसे मवेशियों के लिए बनाए गए शेड में जमा कर लेता है। गिरधारी का भी पूरा परिवार मलबे में दबकर खत्म हो गया। अब वह अकेला है।
कश्मीर का 'मांझी' : महीनों से पत्थरों में तलाश रहा है पत्नी को
सद्दल की तबाही में 40 जाने गईं। सिर्फ 36 शव खोजे जा सके हैं। तमाम सरकारी एजेंसियों ने हाथ खड़े कर दिए। पीड़ित परिवारों ने भी जहां-तहां आसरा ढूंढ़ लिया, लेकिन, जलजले में पूरा परिवार खो चुके गिरधारी और कपूर ने आखिरी सांस तक गांव न छोड़ने की ठान रखी है।
कश्मीर का 'मांझी' : महीनों से पत्थरों में तलाश रहा है पत्नी को
कपूर सिंह बताते हैं कि उस दिन वह कुछ देर के लिए घर से थोड़ी दूर गए थे। पलक झपकते ही घर और घरवाले मलबे में समा गए। पोते सक्षम और पोती रीतू सहित चार शव दूसरे दिन ही मिल गए, दो शव महीनों बाद मिले। इन छह सदस्यों का अंतिम संस्कार हो चुका है।