जम्मू विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर ने मौत से पहले कमरे में मौजूद बोर्ड पर हिंदी में लिखा कि सब सच है क्योंकि कहानी झूठी है। फंदा लगाने के एक घंटा पहले ही एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर को उनका निलंबन पत्र मिला था, जिस पर लिखा था कि आपके खिलाफ जांच रिपोर्ट लंबित होने और इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
Jammu University: सब सच है क्योंकि कहानी झूठी है... लिखकर प्रोफेसर चंद्रशेखर ने लगा लिया फंदा
जम्मू विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर ने मौत से पहले कमरे में मौजूद बोर्ड पर हिंदी में लिखा कि सब सच है क्योंकि कहानी झूठी है।
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सच क्या है?
फंदा लगाने से पहले एसोसिएट प्रोफेसर बड़ा सवाल खड़ा कर गए हैं। सब सच है, क्योंकि कहानी झूठी है। यह बात उन्होंने बोर्ड पर लिख दी, अब इसका जवाब बड़ा सवाल है। इसकी आने वाले दिनों में जांच होगी।
सूसाइड नोट नहीं
एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर ने मरने से पहले बोर्ड पर उक्त सब बातें तो लिख दी, लेकिन सवाल यह है कि किसी से शिकायत थी तो कोई सूसाइड नोट क्यों नहीं लिखा गया।
योर पापा इज नो मोर...
मृतक चंद्रशेखर की पत्नी खुद मनोविज्ञान में पीएचडी हैं। शाम करीब पांच बजे डॉ. नीता को जम्मू विवि से फोन आया कि उनके पति ने खुदकुशी कर ली है। वह अपनी दो साल की बेटी और 12 साल के बेटे को बिना बताए ओल्ड कैंपस जम्मू यूनिवर्सिटी स्थित सरकारी आवास से अस्पताल पहुंची। यहां चंद्रशेखर का शव पहुंच चुका था। शाम सात बजे उनके दोनों बच्चों को पड़ोस में रहने वाली महिलाएं लेकर पहुंचीं। यहां नीता ने अपने बेटे को बताया कि योर पापा इज नो मोर, इस पर बेटे को पहले कुछ समझ नहीं आया। थोड़ी देर बाद उसने पूछा कि कैसे, इस पर नीता ने कहा कि सूसाइड कर लिया। इस पर बेटा बिलख-बिलख कर रोने लगा और कहने लगा कि ऐसे थोड़ी होता है, वह यह कहता-कहता बिलखने लगा।
...कार्रवाई होने से पापा तो नहीं आएंगे
एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर के बेटे की जुबान पर कई सवाल हैं। पापा कैसे मर गए? क्यों मर गए? किसलिए खुदकुशी की? यह सवाल उसने अपनी मां से पूछे। इन सब सवालों के बीच जब उसने यह सुना कि उनके विभाग के लोग तंग करते थे, तो बेटे की जुबान पर विभाग के लिए गुस्सा था। उसने कहा कि विभाग के लोग बुरे हैं। इस पर कुछ मौके पर मौजूद विवि के लोगों ने कहा कि इस पर कार्रवाई होगी। तो बेटे ने कहा, 'ऐसा होने से पापा तो वापस नहीं आएंगे।'
पत्नी बोलीं- 15 साल से बेदाग रहे, एचओडी बनने से पहले आरोप क्यों
एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता ने बताया कि तीन दिन पहले ही उनके पति मेरठ से वापस आए थे। बुधवार सुबह रोज की तरह घर से गए थे। वह बता रहे थे कि उनका प्रमोशन होने वाला है और वह मनोविज्ञान के एचओडी बनने वाले हैं। वह अब प्रोफेसर बनकर एचओडी बनने वाले हैं, लेकिन विभाग के लोग इससे खुश नहीं है। उन्हें तंग किया जाता है।
नीता ने कहा कि यदि उनको पत्र देने वाले कर्मी को पता चल गया कि उन्होंने कमरा बंद कर लिया है, तो कम से कम उनको जानकारी देते। वह किसी भी तरह तत्काल वहां पहुंचकर पति को बचा लेती, लेकिन किसी ने इसकी जानकारी नहीं दी। सवाल करते हुए कहा कि विभाग को उनसे इतनी नफरत क्यों थी? विवाद तो होते रहते हैं, लेकिन विभाग ने इतना तंग किया कि वह जान देने पर मजबूर हो गए। किसी को इतना तंग नहीं करना चाहिए। उन्हें खुदकुशी करने पर मजबूर किया गया है, जिसकी जांच होनी चाहिए।
नीता ने कहा, 'मेरे पति पर जो आरोप लगाए गए हैं वे सच नहीं हो सकते। 15 साल तक जब उन पर किसी तरह का आरोप नहीं लगा तो विभाग के एचओडी से कुछ समय पहले बनने से पहले यह आरोप कैसे लग गए'
पक्ष रखे बिना ही निलंबित कर दिया
डॉ. नीता का कहना है कि यदि उनके खिलाफ जांच हो रही थी। उन पर किसी तरह के आरोप लगे तो कम से कम उनका पक्ष भी सुनना चाहिए था। उनसे पूछे बिना और बात सुने बिना निलंबित करने का आदेश थमा दिया, यह कहां का इंसाफ है। उनके पति इतने कमजोर नहीं थे कि ऐसा करते।
काश ऐसा करने से पहले एक बार बात कर लेते
डॉ. नीता मौके पर मौजूद लोगों से बिलखते हुए बात कर रही थीं और कह रही थीं कि काश एक बार पति ने उनसे बात की होती कि ऐसा करने जा रहे हैं, तो उनको रोक लेतीं।