जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने और इसको केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के फैसले के 20 दिनों बाद घाटी की जिंदगी लगभग पटरी पर लौटती दिख रही है। यों तो ज्यादातर बाजारों में सन्नाटा है, लेकिन सुबह और शाम के वक्त डल झील गुलजार है। लोगों से बातचीत के दौरान कई ऐसी बातें सामने निकलकर आईं जो शायद आपको हैरान कर दें...पढ़िए कश्मीर के हालातों पर बृजेश कुमार सिंह की यह खास रिपोर्ट और देखिए तस्वीरें
कश्मीर के हालात पर खास रिपोर्ट और तस्वीरें, घाटी के युवाओं और बिहारी बाबू के बेबाक बोल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पर्यटकों के न रहने से शिकारे खाली हैं और हाउस बोट में अंधेरा पसरा है, पर डल किनारे बिना किसी खौफ के सैर सपाटा करने वाले कश्मीरियों की कमी नहीं है। लोग सैर कर रहे हैं। सुबह-शाम के वक्त जॉगिंग के साथ ही अपने को फिट रखने के लिए हल्की-फुल्की एक्सरसाइज भी कर रहे हैं।
इनमें ज्यादातर संख्या युवाओं की है, जिनका कहना है कि हमें 370 व अलगाववादियों से क्या लेना-देना, बस हमें हमारे करियर की चिंता है। हमें रोजगार से मतलब है। ये हर हाल में मिलना चाहिए। सरकार की ओर से 50 हजार नियुक्तियों की घोषणा से उम्मीद बंधी है।
डल किनारे ग्रुप के तौर पर सैर कर रहे युवा मोहसिन, एजाज, इमरान आदि छात्र हैं। 370, अलगाववादियों तथा मौजूदा हालात पर बुरा सा मुंह बनाते हुए कहते हैं यह सब हमें क्या देंगे। हमने तो कभी इसके फायदे नहीं जानें। हमें क्या मतलब है 370 व अलगाववादियों से। हमें तो बस अपनी पढ़ाई की चिंता है, करियर बनाने की। हमें बस इसी से मतलब है और कुछ नहीं चाहिए। न 370 और न ही राज्य। यह बात अन्य लोगों की भी समझ में आनी चाहिए।
पूरे डल रोड पर न केवल पैदल यात्री बल्कि निजी वाहनों का मूवमेंट भी है। पहले की तरह जाम की स्थिति तो नहीं उत्पन्न हो रही है, लेकिन कश्मीरियों की इस रोड पर मौजूदगी यह बता रही है कि हालात तेजी से बदल रहे हैं। ट्रैफिक संचालित कर रहे एक कर्मी ने बताया कि आप खुद देख लें कहीं कोई बंदिश नहीं है। सब लोग आराम से जा रहे हैं।